दिल्ली ब्लास्ट के बाद बरेली की मीट फैक्ट्रियों पर जांच एजेंसियों की नजर, बिना वेरिफिकेशन तैनात 27 कश्मीरी गार्डों की जांच शुरू

दिल्ली ब्लास्ट के बाद बरेली की दो मीट एक्सपोर्ट कंपनियों पर जांच एजेंसियों की नजर। बिना पुलिस वेरिफिकेशन के 27 कश्मीरी गार्ड तैनात मिले। LIU ने गार्डों और सिक्योरिटी एजेंसी के मालिक की जांच शुरू की।

Nov 19, 2025 - 14:39
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दिल्ली ब्लास्ट के बाद बरेली की मीट फैक्ट्रियों पर जांच एजेंसियों की नजर, बिना वेरिफिकेशन तैनात 27 कश्मीरी गार्डों की जांच शुरू

बरेली: दिल्ली में हुए ब्लास्ट की जांच का दायरा बढ़ने के बाद, उसकी आंच अब उत्तर प्रदेश के बरेली तक पहुँच गई है। एजेंसियों को मिले इनपुट के आधार पर बरेली की दो बड़ी मीट एक्सपोर्ट कंपनियां रडार पर आ गई हैं, जहाँ सुरक्षा गार्डों की तैनाती में बड़ी लापरवाही सामने आई है।

जांच के दौरान खुलासा हुआ है कि इन दोनों कंपनियों में 27 कश्मीरी युवक सुरक्षा गार्ड के तौर पर तैनात थे, लेकिन किसी का भी स्थानीय पुलिस वेरिफिकेशन नहीं कराया गया था।


सिक्योरिटी एजेंसी का मालिक भी कश्मीर का निकला

सुरक्षा एजेंसियों को यह लापरवाही बेहद गंभीर लगी है। जब जांच टीम ने गार्डों की भर्ती प्रक्रिया खंगाली, तो एक और चौंकाने वाला तथ्य सामने आया:

  • एजेंसी संचालक: दोनों मीट कंपनियों ने जिस निजी सिक्योरिटी एजेंसी से गार्ड मंगाए थे, उसका संचालक भी कश्मीर का रहने वाला निकला।

  • लापरवाही: अधिकारियों ने माना कि संवेदनशील समय में बाहर से आने वाले लोगों को सुरक्षा से जुड़ी जिम्मेदारी देने से पहले वेरिफिकेशन होना बेहद जरूरी है, लेकिन कंपनियों ने यह अनिवार्य प्रक्रिया पूरी नहीं की।

  • जांच तेज: पुलिस ने तुरंत सिक्योरिटी एजेंसी के रजिस्ट्रेशन, वैधानिक दस्तावेज और उसके मालिक के पुराने रिकॉर्ड की जांच शुरू कर दी है।


LIU के हाथ में जांच, वित्तीय लेनदेन भी रडार पर

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पूरा केस लोकल इंटेलिजेंस यूनिट (LIU) को सौंप दिया गया है।

  • गार्डों का रिकॉर्ड: एलआईयू ने सभी 27 कश्मीरी युवकों का रिकॉर्ड खंगालना शुरू कर दिया है। यह पता लगाया जा रहा है कि वे किस रास्ते से बरेली पहुँचे, उन्हें किसने हायर कराया और उनकी भर्ती की प्रक्रिया क्या थी।

  • बैकग्राउंड चेक: उनके पुराने आपराधिक रिकॉर्ड, पारिवारिक बैकग्राउंड और सोशल मीडिया गतिविधियों की भी गहराई से जांच की जा रही है।

  • वित्तीय लेनदेन: सिर्फ पहचान ही नहीं, पुलिस इन युवकों के बैंक खातों और डिजिटल पेमेंट पर भी नजर रखे हुए है, ताकि किसी संदिग्ध नंबर या लोकेशन पर बड़े लेन-देन का पता लगाया जा सके।

पुलिस मीट कंपनियों के मालिकों से भी पूछताछ कर रही है कि उन्होंने इतनी बड़ी संख्या में बिना वेरिफिकेशन के गार्ड क्यों रखे। अधिकारियों का कहना है कि अंतिम जांच रिपोर्ट ही स्थिति स्पष्ट करेगी, जिसके बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।