मौलाना अबुल कलाम आजाद शिक्षा दर्शन: तालीम फाउंडेशन ने मनाई 'जश्ने योमे तालीम', BHU प्रोफेसर बोले- शिक्षा नीति 2020 के परिपेक्ष्य में आजाद के विचारों को समझना ज़रूरी
Maulana Abul Kalam Azad Shiksha Darshan: तामीर फाउंडेशन ने 'जश्ने योमे तालीम' मनाया। BHU प्रोफेसरों ने NEP 2020 के संदर्भ में मौलाना आजाद के शिक्षा दर्शन पर विचार रखे। सेवानिवृत्त उर्दू शिक्षकों का सम्मान किया गया।
चंदौली, उत्तर प्रदेश: राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020) के संदर्भ में मौलाना अबुल कलाम आजाद के शिक्षा दर्शन को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के उद्देश्य से, तामीर फाउंडेशन जिला-चंदौली के तत्वावधान में आज दिनांक 30 नवंबर 2025 को पंडित दीन दयाल उपाध्याय नगर स्थित होटल स्प्रिंग स्काई में 'जश्ने योमे तालीम' का भव्य आयोजन किया गया।
इस कार्यक्रम में जिले भर के शिक्षा प्रेमियों, बुद्धिजीवियों और उर्दू शिक्षकों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।
शिक्षाविदों ने किया संबोधन
कार्यक्रम की अध्यक्षता काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) के उर्दू विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर आफताब अहमद आफाकी ने की।
-
मुख्य अतिथि: उप शिक्षा निदेशक एवं प्राचार्य डायट चंदौली, श्री विकायल भारती।
-
विशिष्ट अतिथि: बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) चंदौली, श्री सचिन कुमार।
-
विशेष वक्ता: प्रो० बृजराज पाण्डेय (पूर्व अध्यक्ष हिन्दी विभाग, BHU), प्रो० सरफराज आलम (भूगोल विभाग, BHU), और हाजी वसीम अहमद (डायरेक्टर अल हनीफ एजुकेशनल सोसाइटी)।
वक्ताओं ने मौलाना अबुल कलाम आजाद के शिक्षा दृष्टिकोण को नई शिक्षा नीति 2020 के परिपेक्ष्य में समझने और अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
सेवानिवृत्त शिक्षकों का सम्मान और मुशायरा
कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा 'तकरीब-ए-एहतराम' रहा, जिसके तहत वर्ष 2025 में सेवा मुक्त हुए उर्दू शिक्षकों को सम्मानित किया गया और शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान को सराहा गया।
-
मुशायरा: कार्यक्रम के दूसरे सत्र में मुशायरा का आयोजन किया गया, जिसमें क्षेत्र के नागवर शायरों ने अपनी गजलों और नज्मों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया।
-
अध्यक्षता: प्रो० याकूब यावर साहब
-
मुख्य अतिथि: अयाज आजमी
-
निजामत: डा० अज़हर सईद (डायट लेकचरर)
-
प्रथम सत्र का संचालन अफ़सा रूमानी और शफायत अली ने किया। मौलाना अबुल कलाम आजाद शिक्षा दर्शन को केंद्रित यह कार्यक्रम जिले में शैक्षिक विमर्श को बढ़ावा देने में सफल रहा।