जिनका कोई नहीं, उनकी आत्मा की शांति के लिए आगे आए प्रवीण राज मिश्रा, मणिकर्णिका घाट पर कराया शांति पाठ

वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर केंद्रीय ब्राह्मण महासभा के राष्ट्रीय महासचिव प्रवीण राज मिश्रा ने लावारिस शवों की आत्मा की शांति के लिए शांति पाठ कराया। जानिए इस मानवीय पहल से जुड़ी पूरी खबर।

Oct 11, 2026 - 15:32
 0
जिनका कोई नहीं, उनकी आत्मा की शांति के लिए आगे आए प्रवीण राज मिश्रा, मणिकर्णिका घाट पर कराया शांति पाठ

वाराणसी। धर्म और आध्यात्मिकता की नगरी काशी में मानवता, करुणा और सेवा भाव का संदेश देते हुए केंद्रीय ब्राह्मण महासभा के राष्ट्रीय महासचिव प्रवीण राज मिश्रा ने मणिकर्णिका घाट पर लावारिस शवों की आत्मा की शांति के लिए शांति पाठ कराया। इस धार्मिक आयोजन के माध्यम से उन दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना की गई, जिनका अंतिम समय में कोई अपना साथ देने वाला नहीं था।

काशी की पावन धरती पर आयोजित इस शांति पाठ का उद्देश्य समाज में मानवीय संवेदनाओं को जागृत करना और यह संदेश देना था कि इंसान की पहचान केवल उसके जीवन तक सीमित नहीं होती, बल्कि मृत्यु के बाद भी प्रत्येक व्यक्ति सम्मान का अधिकारी है। जिन लोगों का इस संसार में कोई अपना नहीं है, उनके प्रति भी समाज को संवेदनशीलता और अपनत्व का भाव रखना चाहिए।

मानवता और संवेदनशीलता का दिया संदेश

प्रवीण राज मिश्रा की इस पहल ने सामाजिक जिम्मेदारी और मानवीय मूल्यों की महत्ता को रेखांकित किया। लावारिस शवों की आत्मा की शांति के लिए धार्मिक अनुष्ठान कराना इस बात का प्रतीक है कि समाज में ऐसे लोगों के प्रति भी सम्मान और संवेदना का भाव बना रहना चाहिए, जो जीवन के अंतिम पड़ाव पर अकेले रह जाते हैं।

इस पहल के माध्यम से समाज को यह संदेश देने का प्रयास किया गया कि सेवा केवल जीवित लोगों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना करना भी मानवीय संवेदनाओं और सामाजिक कर्तव्य का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

महासभा के पदाधिकारी और सदस्य रहे मौजूद

इस अवसर पर केंद्रीय ब्राह्मण महासभा युवा मंच के अध्यक्ष एडवोकेट अनुराग पाण्डेय, छोटू जी, महासभा के राष्ट्रीय महासचिव एडवोकेट प्रवीण राज मिश्रा तथा विधि प्रकोष्ठ के शहर उपाध्यक्ष एडवोकेट सौरभ चन्द्र पाण्डेय सहित संगठन के अन्य पदाधिकारी एवं सदस्यगण उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के माध्यम से मानवता, करुणा और सामाजिक उत्तरदायित्व को सर्वोपरि रखने का संदेश दिया गया। आयोजन ने यह भावना व्यक्त की कि समाज की वास्तविक संवेदनशीलता इस बात से भी पहचानी जाती है कि वह उन लोगों के लिए कितना आगे आता है, जिनके पीछे आंसू बहाने वाला भी कोई नहीं होता।

संदेश: “इंसानियत का धर्म यही है कि जिनका कोई नहीं, उनके लिए भी सम्मान, संवेदना और प्रार्थना के द्वार हमेशा खुले रहें।”

सम्पन्न भारत न्यूज़ | वाराणसी