सुनाली खातून बांग्लादेश डिपोर्टेशन: 6 लोगों को बिना वेरिफिकेशन बांग्लादेश भेजने पर सुप्रीम कोर्ट नाराज़, केंद्र को आदेश- 'पहले वापस लाओ, फिर नागरिकता पर फैसला करो'

Sunali Khatun Bangladesh Deportation: गर्भवती सुनाली खातून समेत 6 लोगों को बिना वेरिफिकेशन बांग्लादेश भेजने पर SC नाराज़। केंद्र को आदेश- पहले वापस भारत लाओ, फिर नागरिकता पर फैसला करो।

Nov 27, 2025 - 10:54
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सुनाली खातून बांग्लादेश डिपोर्टेशन: 6 लोगों को बिना वेरिफिकेशन बांग्लादेश भेजने पर सुप्रीम कोर्ट नाराज़, केंद्र को आदेश- 'पहले वापस लाओ, फिर नागरिकता पर फैसला करो'

नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले की एक गर्भवती महिला सुनाली खातून समेत 6 लोगों को उनकी नागरिकता के वेरिफिकेशन के बिना ही बांग्लादेश भेज दिए जाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को कड़ा निर्देश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (24 नवंबर) को सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार को सभी 6 लोगों को वापस भारत लाने का निर्देश दिया है।

कोर्ट ने स्पष्ट कहा है कि अंतरिम व्यवस्था के तहत, केंद्र सरकार को पहले सभी 6 लोगों को भारत वापस लाना होगा। उनके लौटने के बाद ही अधिकारी उनके डॉक्यूमेंट्स की जांच कर सकते हैं और उनकी नागरिकता की स्थिति पर फैसला कर सकते हैं।


बिना वेरिफिकेशन 3 दिन में किया डिपोर्ट

सुनाली खातून, उनके पति दानिश, उनके 8 साल के बेटे समेत दो अन्य महिलाओं (स्वीटी बीबी) और उनके बच्चे को इस साल जून में दिल्ली से हिरासत में लिया गया था।

  • जल्दबाजी: इन सभी 6 लोगों को दिल्ली पुलिस ने गैर-कानूनी बांग्लादेशी घुसपैठिए होने के शक में उठाया था, और हिरासत में लिए जाने के 3 दिन के अंदर ही उन्हें बांग्लादेश भेज दिया गया

  • कलकत्ता हाई कोर्ट का आदेश: यह मामला सुप्रीम कोर्ट तब पहुंचा जब केंद्र सरकार कलकत्ता हाई कोर्ट के पहले के निर्देश पर कोई कार्रवाई करने में नाकाम रही। 24 सितंबर को ही हाई कोर्ट ने सरकार को 4 हफ्तों के अंदर सभी 6 लोगों को वापस लाने का आदेश दिया था।


पक्के दस्तावेज़ और संपत्ति का रिकॉर्ड

याचिकाकर्ता के वकीलों ने कोर्ट को बताया कि डिपोर्टेशन का कोई भी फैसला लेने से पहले उनके डॉक्यूमेंट्स की जांच होनी चाहिए थी।

  • पक्के सबूत: कोर्ट में जमा किए गए विवरण से पता चला है कि सुनाली खातून और उनके साथ बांग्लादेश भेजी गई कम से कम एक और महिला के पास भारत से जुड़े पुराने और पक्के सबूत वाले दस्तावेज हैं।

  • वोटर लिस्ट में नाम: खातून के माता-पिता के नाम 2002 के इलेक्टोरल रोल में भी दर्ज हैं, जिससे पता चलता है कि वे 2 दशक से भी पहले वोटर के तौर पर देश में रजिस्टर्ड हो चुके थे।

  • जमीन रिकॉर्ड: उनके परिवार ने 1952 से अब तक के जमीन के रिकॉर्ड भी दिखाए हैं, जिसमें देश में लगातार रहने और प्रॉपर्टी के मालिकाना हक को दिखाया गया है।


परिवार को चिंता

सुनाली की बहन करिश्मा ने बताया कि सुनाली की 5 साल की बेटी (जो दिल्ली में रह रही है) अपनी मां से अलग है। सुनाली के परिवार का सुनाली के साथ कोई संपर्क नहीं हो सका है।

बांग्लादेश की कोर्ट भी ढाका में भारतीय दूतावास से इन लोगों को भारत वापस लाने में मदद करने को कह चुकी है। सुनाली खातून बांग्लादेश डिपोर्टेशन मामले की अगली सुनवाई अगले हफ्ते सोमवार (1 दिसंबर) को होनी है।