Exclusive News: कांशीराम आवास योजना में दलाली का 'गंदा खेल'; भ्रष्टाचार उजागर करने पर पत्रकार को फर्जी रेप केस में फंसाने की धमकी

वाराणसी की कांशीराम आवास योजना में अवैध वसूली और आवासों की खरीद-फरोख्त जारी। खबर दिखाने पर पत्रकार को फर्जी केस की धमकी। डूडा और पुलिस मौन।

Jan 11, 2026 - 17:22
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Exclusive News: कांशीराम आवास योजना में दलाली का 'गंदा खेल'; भ्रष्टाचार उजागर करने पर पत्रकार को फर्जी रेप केस में फंसाने की धमकी

वाराणसी। प्रदेश में गरीबों को छत मुहैया कराने के उद्देश्य से निर्मित मान्यवर कांशीराम आवास योजना अब भ्रष्टाचार और अवैध वसूली का केंद्र बन गई है। वाराणसी में इस योजना के अंतर्गत बने भवनों की अवैध खरीद-फरोख्त और किराए पर देने का कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है, लेकिन शहरी आवास विकास (डूडा कार्यालय) इस पूरे मामले पर कुंभकर्णी नींद सोया हुआ है।

गरीबों के हक पर दलालों का डाका

सुश्री मायावती के शासनकाल में गरीबों और असहायों के लिए बनाए गए इन आवासों को अब सक्रिय दलाल चंद रुपयों के लालच में बेच रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, यदि आवास बिक नहीं पा रहे हैं, तो उन पर जबरन कब्जा कर उन्हें किराए पर चढ़ाया जा रहा है और धनउगाही की जा रही है।

ताजा मामला ब्लॉक नम्बर 100, रूम नम्बर 7 का है, जहाँ 'सोनी सेट' नाम की एक महिला पर आवास को अवैध रूप से किराए पर देकर पैसा वसूलने का आरोप लगा है।

सच दिखाने पर 'महिला कार्ड' और धमकी का सहारा

जब एक स्थानीय मीडिया कर्मी ने इस दलाली और भ्रष्टाचार की खबर को प्रमुखता से दिखाया, तो कथित महिला दलाल ने अपने साथियों के साथ मिलकर एक घिनौना षड्यंत्र रचा। आरोप है कि महिला ने पत्रकार को न केवल भद्दी गालियां दीं, बल्कि 'महिला होने का फायदा' उठाकर उसे छेड़खानी और बलात्कार जैसे गंभीर फर्जी मुकदमों में फंसाने की धमकी भी दी।

महिला ने पत्रकार को धमकाते हुए कहा:

"मेरी पहुंच डीएम कार्यालय से लेकर कमिश्नर तक है। मैं महिला हूं और मेरी सुनवाई पहले होगी। तुम्हें छठी का दूध याद दिला दूंगी।"

प्रशासन और पुलिस की चुप्पी पर उठ रहे सवाल

पीड़ित पत्रकार का आरोप है कि इस संबंध में काशीराम पुलिस चौकी पर शिकायत की गई, लेकिन वहां कोई सुनवाई नहीं हुई। संबंधित थाने को भी सूचना दी गई है, परंतु अब तक इन गुंडा प्रवृत्ति के लोगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। स्थानीय लोगों के अनुसार, यह महिला पूर्व में भी कई बार थाना-चौकी के चक्कर काट चुकी है और अक्सर कानून का नाजायज फायदा उठाने की कोशिश करती है।

संपन्न भारत न्यूज़ प्रशासन से मांग करता है कि आवास योजना में चल रही इस धांधली की उच्चस्तरीय जांच हो और पत्रकारों को डराने-धमकाने वाले तत्वों पर सख्त विधिक कार्रवाई की जाए।