काशी हिंदू विश्वविद्यालय में ऐतिहासिक संगोष्ठी: भारतीय ज्ञान प्रणाली और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के समन्वय पर मंथन

काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) में भारतीय ज्ञान प्रणाली (IKS) और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के एकीकरण पर आयोजित संगोष्ठी। शिक्षा, शोध और नवाचार में परंपरा व तकनीक के संतुलन पर विशेषज्ञों का मंथन।

Feb 5, 2026 - 14:48
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काशी हिंदू विश्वविद्यालय में ऐतिहासिक संगोष्ठी: भारतीय ज्ञान प्रणाली और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के समन्वय पर मंथन
काशी हिंदू विश्वविद्यालय में ऐतिहासिक संगोष्ठी: भारतीय ज्ञान प्रणाली और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के समन्वय पर मंथन

काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) में आयोजित एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक संगोष्ठी ने शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में नई दिशा की ओर संकेत किया। यह संगोष्ठी भारतीय ज्ञान प्रणाली (Indian Knowledge System– IKS) जैसी प्राचीन और समृद्ध परंपरा को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence– AI) जैसी आधुनिक एवं भविष्यवादी तकनीक से जोड़ने पर केंद्रित रही। विशेषज्ञों ने इसे परंपरा और तकनीक के संगम की दिशा में एक क्रांतिकारी पहल बताया।

संगोष्ठी का मूल उद्देश्य केवल आधुनिक तकनीक को अपनाना नहीं था, बल्कि उसे भारतीय दर्शन, मूल्यों और सांस्कृतिक चेतना के साथ एकीकृत करना था। वक्ताओं ने इस बात पर बल दिया कि यदि AI को भारतीय ज्ञान परंपरा की जड़ों से जोड़ा जाए, तो शिक्षा और अनुसंधान अधिक मानव-केंद्रित, नैतिक और समाजोपयोगी बन सकते हैं।

परंपरा और तकनीक का संतुलित दृष्टिकोण

संगोष्ठी में प्रो. कल्पलता पाण्डेय ने शिक्षा के माध्यम से भारतीय ज्ञान परंपरा की पुनर्प्रतिष्ठा पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्राचीन भारतीय ग्रंथों, दर्शन और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को आधुनिक पाठ्यक्रम और शोध से जोड़ना समय की आवश्यकता है।

वहीं प्रो. रजनीश शुक्ल ने तकनीक और सांस्कृतिक विरासत के बीच संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि तकनीक यदि सांस्कृतिक मूल्यों से कट जाए, तो वह समाज के लिए चुनौती बन सकती है, लेकिन यदि वह परंपरा से जुड़ जाए, तो वह विकास का सशक्त माध्यम बनती है।

AI के व्यावहारिक उपयोग पर जोर

संगोष्ठी के मुख्य वक्ता एवं BHU के कुलपति प्रो. अजीत कुमार चतुर्वेदी ने AI के व्यावहारिक और प्रायोगिक उपयोग पर विशेष बल दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि AI को केवल भावनात्मक या सैद्धांतिक दृष्टि से देखने के बजाय परिणामोन्मुखी और उपयोगी दृष्टिकोण अपनाना होगा। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान प्रणाली के ग्रंथों, आयुर्वेद, गणित, खगोल विज्ञान और दर्शन को AI के माध्यम से वैश्विक स्तर पर अधिक प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया जा सकता है।

AI और IKS के एकीकरण के संभावित क्षेत्र

संगोष्ठी में विशेषज्ञों ने AI और IKS के समन्वय से जुड़े कई संभावित क्षेत्रों को रेखांकित किया, जिनमें—

प्राचीन ग्रंथों का डिजिटल संरक्षण और AI आधारित विश्लेषण

आयुर्वेद और योग में AI आधारित शोध एवं उपचार पद्धतियाँ

संस्कृत और अन्य प्राचीन भाषाओं के अनुवाद व अध्ययन में AI का उपयोग

शिक्षा प्रणाली में वैदिक और भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक तकनी

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