Varanasi News: यशःकायी साहित्यकार पं. हरिराम द्विवेदी की द्वितीय पुण्यतिथि पर सजेगी साहित्य और लोक गायन की महफ़िल

वाराणसी के महमूरगंज में पं. हरिराम द्विवेदी की द्वितीय पुण्यतिथि पर सम्मान समारोह और 'धनुषयज्ञ शतक' पुस्तक का लोकार्पण। पद्मश्री डॉ. कमलाकर त्रिपाठी करेंगे अध्यक्षता।

Jan 9, 2026 - 11:37
Jan 9, 2026 - 11:38
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Varanasi News: यशःकायी साहित्यकार पं. हरिराम द्विवेदी की द्वितीय पुण्यतिथि पर सजेगी साहित्य और लोक गायन की महफ़िल

वाराणसी से अश्वनी सेठ की रिपोर्ट 

वाराणसी। भोजपुरी साहित्य के अनमोल रत्न और यशस्वी साहित्यकार पं. हरिराम द्विवेदी की द्वितीय पुण्यतिथि के अवसर पर धर्मनगरी काशी में एक भव्य सम्मान समारोह, पुस्तक लोकार्पण एवं लोक गायन कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। पं. हरिराम द्विवेदी भोजपुरी साहित्य शोध न्यास के तत्वावधान में आयोजित यह समारोह साहित्यकारों और कला प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र होगा।

विद्वानों और राजनेताओं का जुटेगा संगम

यह गरिमामय कार्यक्रम 08 जनवरी 2026 (गुरुवार) को दोपहर 1 बजे से मोतीझील, महमूरगंज स्थित कार्यक्रम स्थल पर आयोजित होगा। समारोह की अध्यक्षता पद्मश्री डॉ. कमलाकर त्रिपाठी करेंगे।

समारोह के मुख्य एवं विशिष्ट अतिथि:

  • मुख्य अतिथि: आनंद कुमार त्यागी (कुलपति, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ)।

  • विशिष्ट अतिथि: डॉ. दयाशंकर मिश्र 'दयालु' ( आयुष राज्य मंत्री, स्वतंत्र प्रभार, उ.प्र. सरकार), अशोक तिवारी (महापौर, वाराणसी) और डॉ. धर्मेंद्र राय (माननीय सदस्य विधान परिषद, उ.प्र.)।

  • सारस्वत अतिथि: डॉ. हरेंद्र राय, प्रो. सविता भारद्वाज, प्रो. आशा यादव और  योगेश अग्रवाल।

सम्मान एवं पुस्तक लोकार्पण

समारोह के दौरान समाज और साहित्य में विशेष योगदान देने वाली विभूतियों को सम्मानित किया जाएगा:

  • सम्मान: मिर्जापुर की पद्मश्री उर्मिला श्रीवास्तव, गाजीपुर के राम नारायण तिवारी और वाराणसी के डॉ. दुर्गेश उपाध्याय को विशिष्ट सम्मान से नवाजा जाएगा।

  • लोकार्पण: लोक भूषण साहित्यकार डॉ. जय प्रकाश मिश्र द्वारा रचित पुस्तक 'धनुषयज्ञ शतक' का भव्य लोकार्पण अतिथियों द्वारा किया जाएगा।

आयोजन का उद्देश्य

न्यास के अध्यक्ष पं. रामानंद तिवारी एवं कोषाध्यक्ष अरुण कुमार द्विवेदी ने बताया कि पं. हरिराम द्विवेदी जी ने अपना संपूर्ण जीवन भोजपुरी भाषा और लोक संस्कृति के उत्थान में समर्पित कर दिया। उनकी स्मृति में आयोजित यह वार्षिक कार्यक्रम उनकी साहित्यिक विरासत को जीवित रखने और नई पीढ़ी को लोक संस्कृति से जोड़ने का एक प्रयास है।