इलाहाबाद हाईकोर्ट धर्मांतरण अनुसूचित जाति लाभ: ईसाई बनने वालों को अनुसूचित जाति से जुड़ी सुविधाएं बंद हों; HC का बड़ा फैसला, 4 महीने में कार्रवाई का निर्देश

Allahabad High Court Dharmantaran Anusuchit Jaati Laabh: HC का अहम फैसला, ईसाई बनने वालों को अनुसूचित जाति की सुविधाएं बंद हों। कोर्ट ने इसे संविधान से धोखाधड़ी बताया और UP सरकार को 4 महीने में कार्रवाई का निर्देश दिया।

Dec 3, 2025 - 14:06
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इलाहाबाद हाईकोर्ट धर्मांतरण अनुसूचित जाति लाभ: ईसाई बनने वालों को अनुसूचित जाति से जुड़ी सुविधाएं बंद हों; HC का बड़ा फैसला, 4 महीने में कार्रवाई का निर्देश

प्रयागराज, उत्तर प्रदेश: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने धर्मांतरण को लेकर एक अत्यंत महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने मंगलवार को अपने एक फैसले में स्पष्ट किया कि धर्मांतरण के बाद अनुसूचित जाति (SC) का दर्जा बनाए रखना संविधान के साथ धोखाधड़ी के समान है। हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश दिया है कि वह यह सुनिश्चित करे कि दूसरे धर्म (ईसाई धर्म) को स्वीकार करने वाले लोग अनुसूचित जाति के तहत मिलने वाले सभी लाभों से वंचित हो जाएं।

जस्टिस प्रवीण कुमार गिरि की बेंच ने धर्मांतरण के बाद SC दर्जे का लाभ लेने वाले लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने के लिए 4 महीने की समयसीमा तय कर दी है।


संविधान के साथ धोखाधड़ी

  • कोर्ट का निर्देश: हाई कोर्ट ने पूरे प्रशासनिक तंत्र को यह तय करने का निर्देश दिया कि धर्मांतरण के बाद ईसाई बनने वाले लोग अनुसूचित जाति के तहत मिलने वाले लाभ न ले सकें।

  • सख्ती: कोर्ट ने अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव को निर्देश दिया कि अल्पसंख्यक दर्जा और अनुसूचित जाति के दर्जे के बीच अंतर को सख्ती से लागू किया जाए।


हलफनामे में खुद को बताया हिंदू

कोर्ट ने यह फैसला जितेंद्र साहनी नामक शख्स की याचिका खारिज करते हुए जारी किया। साहनी पर हिंदू देवी-देवताओं का मजाक उड़ाने और वैमनस्य को बढ़ावा देने का आरोप है।

  • याचिका का आधार: साहनी ने अपने खिलाफ चल रहे आपराधिक केस कार्यवाही को रद्द करने की मांग की थी।

  • कोर्ट का अवलोकन: कोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ता की ओर से दाखिल हलफनामे में अपना धर्म हिंदू लिखा गया है, जबकि वह धर्म बदलकर ईसाई धर्म अपना चुका था। धर्मांतरण से पहले याचिकाकर्ता का ताल्लुक अनुसूचित जाति समुदाय से था।

कोर्ट ने जिलाधिकारियों को 4 महीने के अंदर ऐसे मामलों की पहचान कर कानून के मुताबिक कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।