Varanasi News: काशी विश्वनाथ कुष्ठ आश्रम में 'नीड असेसमेंट कैंप' का आयोजन; कुष्ठ प्रभावित दिव्यांगों को आत्मनिर्भर बनाने की पहल
वाराणसी के संकट मोचन स्थित कुष्ठ आश्रम में CRC और NLR इंडिया फाउंडेशन द्वारा शिविर आयोजित। 12 दिव्यांगों के लिए ट्राइसाइकिल और अन्य उपकरणों की हुई पहचान।
वाराणसी। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय (भारत सरकार) के अंतर्गत संचालित कंपोजिट रीजनल सेंटर (CRC) और एनएलआर इंडिया फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में मंगलवार को संकट मोचन स्थित काशी विश्वनाथ कुष्ठ आश्रम में एक विशेष 'नीड असेसमेंट कैंप' का आयोजन किया गया। इस शिविर का मुख्य उद्देश्य कुष्ठ से प्रभावित दिव्यांगजनों की जरूरतों की पहचान कर उन्हें आवश्यक सहायक उपकरण और पुनर्वास सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
12 दिव्यांगजनों की जरूरतों का हुआ विस्तृत आकलन
शिविर के दौरान विशेषज्ञों की टीम ने 12 कुष्ठ प्रभावित दिव्यांग व्यक्तियों का गहन परीक्षण किया। जांच के बाद उनके लिए निम्नलिखित सहायक उपकरणों की आवश्यकता चिन्हित की गई:
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उपकरण: मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल, सामान्य ट्राइसाइकिल, एडीएल किट (ADL Kit) और सेंसरी इक्विपमेंट।
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सुविधाएं: डिसेबल कंबोड, यूडीआईडी (UDID) कार्ड और विशेष रूप से निर्मित एमसीआर (MCR) चप्पलें। इन उपकरणों के वितरण से ये व्यक्ति अपने दैनिक कार्यों को सुगमता से कर सकेंगे और समाज की मुख्यधारा से जुड़ सकेंगे।
8 राज्यों के 59 जिलों में सक्रिय है एनएलआर इंडिया
कार्यक्रम के आयोजक एवं एनएलआर इंडिया फाउंडेशन के प्रतिनिधि विपिन सिंह ने बताया कि उनकी संस्था देश के 8 राज्यों के 59 जिलों में कुष्ठ उन्मूलन, उपचार और पुनर्वास के क्षेत्र में मिशन मोड में कार्य कर रही है। काशी में आयोजित यह कैंप इसी श्रृंखला का एक हिस्सा है, ताकि प्रभावितों को सम्मानजनक जीवन जीने में मदद मिल सके।
वरिष्ठ अधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति
इस अवसर पर कंपोजिट रीजनल सेंटर के निदेशक अवनीश कुमार झा ने स्वयं मरीजों का अवलोकन किया और उनकी समस्याओं को सुना। शिविर में अलीमको (ALIMCO) के पदाधिकारी नमो नारायण पाठक, आशीष परमार एवं अवनीन कुमार सिंह भी तकनीकी सहयोग हेतु उपस्थित रहे।
आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम
शिविर में काशी विश्वनाथ कुष्ठ आश्रम के सभी निवासी और उनके परिजन शामिल हुए। विशेषज्ञों ने उन्हें कुष्ठ रोग के बाद की सावधानियों और सरकारी योजनाओं के लाभ के बारे में भी जागरूक किया। कार्यक्रम का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि दिव्यांग कुष्ठ पीड़ितों को आत्मनिर्भर बनाकर उन्हें समाज में एक सम्मानित स्थान दिलाया जाएगा।