बिलासपुर पति पत्नी हत्याकांड लिपस्टिक: 'दूसरे से करती थी बात…', शक में पति ने पत्नी का गला घोंटा, फिर उसी की लिपिस्टिक से दीवार पर लिखी पूरी कहानी
Bilaspur Pati Patni Hatya Kand Lipstick: बिलासपुर में शक के चलते पति ने लव मैरिज वाली पत्नी का गला घोंटा, फिर खुदकुशी की। दीवार पर लिपस्टिक से सुसाइड नोट और बेवफाई के आरोप लिखे गए।
बिलासपुर, छत्तीसगढ़: छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहाँ पति-पत्नी की संदिग्ध मौत ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी। सरकंडा थाना क्षेत्र के अटल आवास में रहने वाले दंपती राज तांबे ने बेवफाई के शक में पत्नी नेहा उर्फ शिवानी तांबे का गला घोंटकर हत्या कर दी और फिर खुद भी पंखे से लटककर जान दे दी।
इस जघन्य बिलासपुर पति पत्नी हत्याकांड लिपस्टिक में सबसे सनसनीखेज खुलासा यह हुआ कि पति ने पत्नी की लिपस्टिक का इस्तेमाल करके दीवार पर अपनी मौत की वजह, शक और पत्नी के कथित अफेयर से जुड़े गंभीर आरोप लिखे।
लिपस्टिक से लिखा सुसाइड नोट
सरकंडा पुलिस के थाना प्रभारी प्रदीप आर्या ने बताया कि रविवार को जब उनके घर का दरवाजा नहीं खुला तो पड़ोसियों की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची।
-
मौके के हालात: कमरे में पत्नी नेहा उर्फ शिवानी बिस्तर पर मृत पड़ी थी (गला घोंटा गया था), जबकि पति राज तांबे पंखे से झूलता मिला।
-
दीवार पर आरोप: दीवार पर लिपस्टिक से जो बातें लिखी थीं, उन्होंने ही मामले को सनसनीखेज बना दिया। पति ने लिखा था कि उसकी पत्नी दूसरे से बात करती थी, और ऊर्जा पार्क में मिलते पकड़ी गई थी।
-
जिम्मेदारी: दीवार पर राजेश विश्वास नाम और मोबाइल नंबर भी लिखा था, जिन्हें पति ने अपनी मौत के लिए जिम्मेदार ठहराया।
क्या शक हत्या की वजह बन सकता है?
पुलिस के अनुसार, यह स्पष्ट है कि हत्या की मुख्य वजह पत्नी के अफेयर और अवैध संबंध थे, जिसके चलते राज तांबे बेहद शक करता था और इसी तनाव में यह 'क्राइम ऑफ पैशन' हुआ।
-
लायन्स कंपनी में काम: राज और नेहा दोनों लायंस कंपनी में सफाईकर्मी का काम करते थे।
-
10 साल का प्रेम विवाह: थाना प्रभारी ने बताया कि दोनों ने 10 साल पहले प्रेम विवाह किया था और उनके तीन मासूम बच्चे हैं।
पुलिस अधिकारियों ने इसे समाज के लिए चेतावनी बताया है। उन्होंने कहा कि संदेह, नियंत्रण और हिंसा ने मिलकर एक परिवार को दो लाशों में बदल दिया। यह मामला सिर्फ जांच का विषय नहीं, बल्कि समाज में बढ़ती मनोवैज्ञानिक असुरक्षाओं को भी दिखाता है।