बुरहानपुर पूर्व फौजी हत्या: "खुद को मरा दिखाना था, ले ली मजदूर की जान..." बुरहानपुर में पूर्व पैरा कमांडो का खूनी खेल, दुश्मन को फंसाने के लिए रची थी 30,000 के इनामी हुसन ने साजिश
Burhanpur Poorv Fauji Hatya: बुरहानपुर में पूर्व पैरा कमांडो हुसन सिंह गिरफ्तार। दुश्मन को फंसाने के लिए मजदूर की हत्या कर जेब में अपना आधार कार्ड रखा। 1.5 साल बाद खुलासा।
बुरहानपुर, मध्य प्रदेश: बुरहानपुर पुलिस ने डेढ़ साल पहले कुंडी भंडारे में हुई एक जघन्य हत्या (अंधा कत्ल) का पर्दाफाश करते हुए सनसनीखेज खुलासा किया है। इस वारदात को अंजाम देने वाला आरोपी कोई और नहीं, बल्कि दसवीं बटालियन पैरामिलिट्री फोर्स का पूर्व सदस्य और ₹30,000 का इनामी हुसन सिंह है, जिसे उत्तर प्रदेश के आगरा से गिरफ्तार किया गया है।
बुरहानपुर पूर्व फौजी हत्या की साजिश हैरान कर देने वाली है। पूर्व फौजी हुसन सिंह ने अपने दुश्मन प्रीतेश गुप्ता को फंसाने के लिए एक मजदूर की हत्या की, उसकी पहचान मिटाई और उसकी जेब में जानबूझकर अपना आधार कार्ड रख दिया था, ताकि पुलिस उसे मरा हुआ मान ले और शक प्रीतेश पर जाए।
वारदात और फर्जी पहचान
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लाश मिली: 25 मई 2024 को कुंडी भंडारा क्षेत्र के एक खेत में एक जली हुई लाश मिली थी, जिसका चेहरा पहचान में नहीं आ रहा था।
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पहचान का मोहरा: मृतक की पैंट की जेब में हुसन सिंह का आधार कार्ड और कुछ दस्तावेज मिले थे। पुलिस ने शुरू में इसे हुसन सिंह की लाश माना।
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मोड़: जब पुलिस ने हुसन सिंह के परिवार से संपर्क किया, तो उनके भाई और पिता ने लाश की पहचान करने से इनकार कर दिया और बताया कि हुसन तो अपने दोस्त गणेश शर्मा के साथ एक होटल चला रहा है।
पूछताछ में खुला राज
पुलिस टीम तत्काल महाराष्ट्र के पनवेल में गणेश शर्मा से पूछताछ करने गई। गणेश ने पूरी साजिश का खुलासा किया:
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शिकार: 22 नवंबर 2024 को हुसन और गणेश महाराष्ट्र के मनमाड़ से एक मजदूर को बुरहानपुर लेकर आए।
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हत्या: दोनों ने मजदूर को खूब शराब पिलाई, फिर मौका देखकर उसका गला दबाकर हत्या कर दी। मृतक की पहचान बाद में कैलाश सावले के रूप में हुई (डीएनए टेस्ट से पुष्टि)।
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पहचान मिटाई: हुसन ने लाश की पहचान छुपाने के लिए उसे पेट्रोल डालकर जला दिया और दुश्मन को फंसाने के लिए अपनी पहचान का आधार कार्ड मृतक की जेब में रख दिया।
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मकसद: पूछताछ में हुसन सिंह ने बताया कि प्रीतेश गुप्ता नाम के शख्स से पैसे के लेनदेन को लेकर उसकी दुश्मनी थी, और उसी को फंसाने के लिए उसने यह खूनी साजिश रची थी।
पैरा कमांडो की गिरफ्तारी
हुसन सिंह पूर्व पैरामिलिट्री फोर्स में 6 साल तक काम कर चुका था, लेकिन मारपीट और अन्य आरोपों के चलते उसे मिलिट्री से निकाल दिया गया था। वह लगातार पुलिस की पकड़ से बच रहा था।
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फरार: डेढ़ साल तक वह अलग-अलग राज्यों में भागता रहा।
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गिरफ्तारी: बुरहानपुर पुलिस ने मोबाइल नंबर और सोशल मीडिया अकाउंट ट्रेस कर आखिरकार उत्तर प्रदेश के आगरा में उसका पता लगाया और आगरा एसटीएफ की मदद से सराय मंदिर के पास से उसे गिरफ्तार कर लिया।
हुसन सिंह पर लूट, धोखाधड़ी, हत्या और गैंगस्टर जैसे कई गंभीर अपराध पहले से ही दर्ज हैं।