दिल्ली दंगे देश की संप्रभुता पर हमला… पुलिस ने SC में उमर खालिद, शरजील इमाम की जमानत का किया कड़ा विरोध; अगली सुनवाई 20 नवंबर को
दिल्ली दंगे केस: SC में दिल्ली पुलिस ने उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत का विरोध किया। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा- दंगे पूर्व नियोजित और राष्ट्र की संप्रभुता पर हमला थे।
नई दिल्ली: 2020 के पूर्वोत्तर दिल्ली दंगों के आरोपी उमर खालिद, शरजील इमाम और अन्य की जमानत याचिका पर मंगलवार (18 नवंबर) को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान दिल्ली पुलिस का प्रतिनिधित्व कर रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जमानत याचिकाओं का कड़ा विरोध करते हुए इसे ‘राष्ट्र की संप्रभुता पर हमला’ बताया।
मामले की अगली सुनवाई 20 नवंबर को निर्धारित की गई है।
दंगे पूर्व नियोजित थे, सांप्रदायिक आधार पर बांटने की कोशिश
जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच के सामने पेश होते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दावा किया कि ये दंगे CAA विरोधी प्रदर्शन से भड़की हिंसा मात्र नहीं थे।
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सुनियोजित दंगा: मेहता ने कहा, "सबसे पहले इस मिथक को तोड़ा जाना चाहिए। यह कोई स्वाभाविक दंगा नहीं था। यह एक सुनियोजित, सुनियोजित, पूर्व नियोजित दंगा था। यह एकत्रित साक्ष्यों से सामने आएगा।"
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मकसद: उन्होंने तर्क दिया कि यह हिंसा केवल सीएए के खिलाफ आंदोलन नहीं थी, बल्कि समाज को सांप्रदायिक आधार पर बांटने का प्रयास था।
जमानत में देरी के लिए आरोपी जिम्मेदार
आरोपी लंबे समय से जेल में हैं, जिस पर मेहता ने कहा कि विचाराधीन कैदी के रूप में पांच साल जेल में बिताना उनकी जमानत पर विचार करने का आधार नहीं होना चाहिए।
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मुकदमे में बाधा: मेहता ने दावा किया कि अभियुक्तों ने मुकदमे को पटरी से उतारने या उसमें देरी करने के इरादे से आरोप तय करने में बाधा डाली, जिसके कारण सुनवाई में देरी हुई। उन्होंने कहा कि देरी के लिए आरोपी ज़िम्मेदार हैं।
शरजील इमाम पर गंभीर आरोप
तुषार मेहता ने शरजील इमाम पर लगे आरोपों पर भी ज़ोर दिया।
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चक्का जाम की प्रेरणा: मेहता ने कहा कि शरजील इमाम ने मुसलमानों को एकजुट होने और दिल्ली सहित हर उस शहर को ‘ठप’ करने के लिए प्रेरित किया था, जहाँ मुसलमान रहते हैं।
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सोशल मीडिया: उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर यह कहानी गढ़ी जा रही थी कि युवाओं के साथ कुछ बहुत गंभीर हो रहा है।
फरवरी 2020 में हुए दंगों में 53 लोग मारे गए थे और 700 से अधिक घायल हुए थे। इस मामले में उमर खालिद, शरजील इमाम, गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर और रहमान सहित कई लोगों पर आतंकवाद विरोधी कानून (UAPA) और आईपीसी के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया था।