दिल्ली प्रदूषण AQI: पंजाब-हरियाणा में पराली जलाने की घटनाओं में रिकॉर्ड 90% तक कमी, फिर भी क्यों घुट रहा दिल्ली का दम? सामने आए CAQM के चौंकाने वाले आंकड़े

Delhi Pollution AQI Sudhaar: CAQM के आंकड़े- पंजाब-हरियाणा में पराली जलाने की घटनाओं में 90% तक की रिकॉर्ड कमी। फिर भी दिल्ली का दम क्यों घुट रहा? स्थानीय प्रदूषण स्रोतों पर उठे सवाल।

Dec 1, 2025 - 23:37
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दिल्ली प्रदूषण AQI: पंजाब-हरियाणा में पराली जलाने की घटनाओं में रिकॉर्ड 90% तक कमी, फिर भी क्यों घुट रहा दिल्ली का दम? सामने आए CAQM के चौंकाने वाले आंकड़े

नई दिल्ली: दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण को लेकर चल रही तीखी सियासी बहस के बीच, वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने सोमवार को चौंकाने वाले आंकड़े जारी किए हैं। CAQM के मुताबिक, इस साल पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने की घटनाओं में रिकॉर्ड कमी दर्ज की गई है, बावजूद इसके दिल्ली की आबोहवा लगातार 'बेहद खराब' श्रेणी में बनी हुई है।

यह डेटा इस सवाल को जन्म देता है कि जब पराली जलाने को प्रदूषण का मुख्य कारण बताया जाता है, तो इस ऐतिहासिक कमी के बाद भी दिल्ली की हवा इतनी दमघोंटू क्यों है?


पराली जलाने में 90% तक की गिरावट (2021 से 2025)

इस साल 15 सितंबर से 30 नवंबर के बीच धान की कटाई के सीजन में पंजाब और हरियाणा ने पराली प्रबंधन में सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की है:

राज्य 2025 में दर्ज घटनाएं 2021 की तुलना में कमी 2024 की तुलना में कमी
पंजाब 5,114 93% 53%
हरियाणा 662 91% 53%

CAQM ने बताया कि ये आंकड़े हाल के सालों में दर्ज की गई लगातार कमी को दिखाते हैं और यह सबसे बड़ी गिरावट है जब से आयोग ने निगरानी शुरू की है।


कमी के बावजूद दिल्ली का AQI क्यों गंभीर?

CAQM के आंकड़ों से यह स्पष्ट हो गया है कि दिल्ली के प्रदूषण में पराली जलाने का योगदान अब काफी कम हो चुका है। इससे यह सवाल उठ रहे हैं कि आखिर दिल्ली की आबोहवा अब भी इतनी प्रदूषित क्यों है, जिसके लिए GRAP-3 और GRAP-4 जैसे सख्त नियम लागू करने पड़े थे।

विशेषज्ञों का मानना है कि पराली के अलावा, वाहन प्रदूषण, निर्माण स्थलों से धूल, और औद्योगिक उत्सर्जन जैसे स्थानीय कारक अब दिल्ली के प्रदूषण में सबसे बड़ा योगदान दे रहे हैं, जिन्हें नियंत्रित करने की जरूरत है।


सफल हुआ एक्शन प्लान

पंजाब और हरियाणा में यह रिकॉर्ड कमी राज्य-विशिष्ट एक्शन प्लान को लागू करने से आई है:

  • मशीनरी का उपयोग: बड़े पैमाने पर फसल अवशेष मैनेजमेंट मशीनरी लगाई गई।

  • एक्स-सिटू इस्तेमाल: धान की पराली का बेहतर एक्स-सिटू इस्तेमाल (Biomass Energy, इंडस्ट्रियल बॉयलर, बायो-इथेनॉल, ब्रिकेट्स और को-फायरिंग)।

  • निगरानी: फ्लाइंग स्क्वॉड, पराली प्रोटेक्शन फोर्स और CAQM सेल (चंडीगढ़) द्वारा लगातार निगरानी की गई।

CAQM ने उम्मीद जताई है कि धान की पराली जलाने को पूरी तरह खत्म करने के लिए लगातार प्रयास जारी रहेंगे, जिससे आने वाले सालों में इलाके की ओवरऑल एयर क्वालिटी में लगातार सुधार होगा।