उत्तराखंड डॉक्टरों की सैलरी 7 लाख: धामी सरकार का बड़ा फैसला, पर्वतीय क्षेत्रों में विशेषज्ञ डॉक्टरों का मासिक वेतन ₹7 लाख हुआ; 'यू कोड-वी पे' योजना में हुआ संशोधन

Uttarakhand Doctors Ki Salary 7 Lakh: धामी सरकार ने 'यू कोड-वी पे' योजना के तहत विशेषज्ञ डॉक्टरों का मासिक वेतन ₹7 लाख किया। पर्वतीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं मजबूत करने का बड़ा फैसला।

Dec 1, 2025 - 14:03
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उत्तराखंड डॉक्टरों की सैलरी 7 लाख: धामी सरकार का बड़ा फैसला, पर्वतीय क्षेत्रों में विशेषज्ञ डॉक्टरों का मासिक वेतन ₹7 लाख हुआ; 'यू कोड-वी पे' योजना में हुआ संशोधन

देहरादून, उत्तराखंड: उत्तराखंड की धामी सरकार ने राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को क्रांतिकारी रूप से मजबूत करने के लिए एक बड़ा और महत्वपूर्ण फैसला लिया है। अब राज्य के सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों को ₹7 लाख रुपये तक मासिक वेतन दिया जाएगा। इस वृद्धि का उद्देश्य पहाड़ों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी को खत्म करना है।

यह बदलाव हाल ही में शुरू की गई महत्वाकांक्षी 'यू कोड-वी पे' (You Code, We Pay) योजना के अंतर्गत वेतन संरचना में संशोधन के बाद लागू होगा।


पहाड़ों में डॉक्टरों की कमी का समाधान

राज्य के पहाड़ी इलाकों में लंबे समय से विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी थी, क्योंकि चुनौतीपूर्ण भौगोलिक परिस्थितियों के कारण डॉक्टर इन क्षेत्रों में सेवा देने से कतराते थे।

  • योजना का उद्देश्य: 'यू कोड-वी पे' योजना के तहत विशेषज्ञ डॉक्टरों को उनकी योग्यता और सेवा आवश्यकताओं के अनुसार मनचाहा वेतन प्रदान किया जाता है, ताकि उन्हें पहाड़ के अस्पतालों में तैनात किया जा सके।

  • वेतन वृद्धि: पहले इस योजना के तहत डॉक्टरों को अधिकतम ₹5 लाख तक मासिक वेतन दिया जाता था, जिसे अब सुपर स्पेशलिटी सेवाओं की उपलब्धता को बढ़ाने के लिए बढ़ाकर ₹7 लाख रुपए कर दिया गया है।


इन क्षेत्रों में मिलेगी राहत

स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने बताया कि सरकार का उद्देश्य है कि विशेषज्ञ डॉक्टरों को बेहतर प्रोत्साहन देकर उन्हें पहाड़ के अस्पतालों में तैनात किया जाए।

  • आवश्यकता वाले क्षेत्र: चौखुटिया, पिलखी, बेलेश्वर, गैरसैंण, धुमाकोट और पिथौरागढ़ जैसे कई पर्वतीय क्षेत्रों से लगातार विशेषज्ञ डॉक्टरों की मांग उठ रही थी।

  • प्रभाव: इस फैसले के बाद उम्मीद है कि अधिक संख्या में विशेषज्ञ डॉक्टर पहाड़ी क्षेत्रों में सेवा देने के लिए आगे आएंगे। इससे न सिर्फ स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार होगा, बल्कि गंभीर बीमारियों के इलाज में होने वाली देरी और मैदानी अस्पतालों पर बढ़ते बोझ में भी कमी आएगी।