कानपुर मुकदमा 27 साल सजा 3 घंटे: 27 साल चला मारपीट का मुकदमा, आरोपी पति-पत्नी को कोर्ट ने सुनाई सिर्फ 3 घंटे कटघरे में खड़े रहने की सजा

Kanpur Mukadma 27 Saal Saza 3 Ghante: कानपुर में 27 साल पुराने मारपीट के मुकदमे का निपटारा। पति-पत्नी को सिर्फ 3 घंटे कटघरे में खड़े रहने और ₹3,500 जुर्माने की सजा मिली।

Nov 27, 2025 - 19:22
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कानपुर मुकदमा 27 साल सजा 3 घंटे: 27 साल चला मारपीट का मुकदमा, आरोपी पति-पत्नी को कोर्ट ने सुनाई सिर्फ 3 घंटे कटघरे में खड़े रहने की सजा

कानपुर, उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले में न्यायिक प्रक्रिया का एक ऐसा अनोखा मामला सामने आया है, जिसने लंबित मुकदमों की समस्या को उजागर कर दिया है। कल्याणपुर थाने में 1998 में दर्ज हुए एक मारपीट के मुकदमे का अंतिम निपटारा 27 वर्षों बाद हुआ। आरोपी पति-पत्नी को कोर्ट ने दोषी मानते हुए उन्हें सिर्फ 3 घंटे कोर्ट कक्ष में कटघरे में खड़े रहने और ₹3,500 जुर्माने की सजा सुनाई।

जुर्माना जमा करने के बाद दोनों आरोपियों को शाम को बरी कर दिया गया।


1998 में दर्ज हुआ था केस

  • मामला: यह मामला मार्च 1998 का है। शिकायतकर्ता संतोष कुमार ने अपने सगे चाचा कन्हई लाल और चाची उर्मिला देवी के खिलाफ मारपीट की शिकायत दर्ज कराई थी।

  • आरोप: संतोष कुमार का आरोप था कि उनके चाचा और चाची ने लोहे की सरिया से उन पर हमला कर दिया, जिससे उन्हें गंभीर चोटें आईं।

  • धाराएं: पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 147 (मारपीट), 504 (धमकी) और 324 (धारदार हथियार से हमला) के तहत मुकदमा दर्ज किया था।


27 वर्षों तक लंबित रहा मुकदमा

विवेचना के दौरान पुलिस ने दोनों आरोपियों के विरुद्ध चार्जशीट न्यायालय को प्रेषित कर दी थी, लेकिन यह मुकदमा विभिन्न कारणों से 27 वर्षों तक लंबित रहा और बार-बार तारीखें बढ़ती रहीं।

  • अपराध स्वीकार: अंततः हाल ही में हुई सुनवाई के दौरान, आरोपी पति-पत्नी कन्हई लाल और उर्मिला देवी ने कोर्ट में अपना अपराध स्वीकार कर लिया और सजा में रहम बरतने की प्रार्थना की।

  • अनोखी सजा: विशेष न्यायाधीश ने दोनों को दोषी ठहराते हुए उन्हें कोर्ट कक्ष में कटघरे में खड़े रहने की सजा सुनाई। साथ ही ₹3,500 रुपए का जुर्माना लगाया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जुर्माना न जमा करने पर सात दिनों का कारावास होगा।


वादी ने जताई असंतुष्टि

दोनों आरोपियों ने निर्धारित राशि जमा कर दी और शाम को बरी कर दिए गए। कानपुर मुकदमा 27 साल सजा 3 घंटे का यह निपटारा न्यायिक प्रक्रिया में लंबित मुकदमों की समस्या को उजागर करता है। वादी (शिकायतकर्ता) इस निर्णय से संतुष्ट नहीं है और उसने अपील की बात कही है।