MP Crime Alert: ‘3 दिन में दो जवाब, नहीं तो काट लेंगे सैलरी…’ मौत के बाद टीचर्स को अटेंडेंस के लिए भेजा नोटिस, शिक्षा विभाग में हड़कंप
MP Crime: मध्य प्रदेश के मऊगंज में शिक्षा विभाग की बड़ी लापरवाही। मृत टीचर्स को ई-अटेंडेंस न लगाने पर नोटिस भेजा गया, जवाब न देने पर सैलरी काटने की धमकी।
मऊगंज: मध्य प्रदेश (MP) में शिक्षा विभाग की एक ऐसी घोर लापरवाही सामने आई है, जिसने पूरे प्रदेश को हैरान कर दिया है। मऊगंज जिले में ई-अटेंडेंस की जाँच के दौरान, शिक्षा विभाग ने ऐसे तीन मृत शिक्षकों को नोटिस जारी कर दिया है, जिनसे तीन दिन के भीतर जवाब माँगा गया है और जवाब न देने पर वेतन काटने की चेतावनी दी गई है। यह मामला MP Crime के तहत प्रशासनिक चूक का सबसे बड़ा उदाहरण बन गया है।
इस गंभीर प्रशासनिक चूक के बाद यह सवाल उठ रहा है कि क्या मृत शिक्षकों को अब भी वेतन-भत्ते दिए जा रहे थे? मामला सामने आने के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है और अधिकारी इसे 'विभागीय गलती' मानकर पल्ला झाड़ने में लगे हुए हैं।
मृत टीचर्स को शिक्षा विभाग का नोटिस
प्रदेश के सरकारी स्कूलों में ई-अटेंडेंस व्यवस्था लागू होने के बाद, विभाग ने 1500 से ज्यादा शिक्षकों को नोटिस भेजा कि वे शिक्षक ऐप पर रोज़ाना हाज़िरी क्यों नहीं लगा रहे। लेकिन इस लिस्ट में तीन ऐसे नाम शामिल थे, जिनकी मौत पहले ही हो चुकी थी।
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रामगरीब दीपांकर: प्राथमिक स्कूल बैरिहा के ये शिक्षक 17 फरवरी 2025 को मृत हो चुके थे, लेकिन उन्हें भी ई-अटेंडेंस शून्य होने पर नोटिस मिला।
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छोटेलाल साकेत: दुबगवां प्राथमिक शाला के ये शिक्षक 29 मई 2025 को मृत हुए थे, इन्हें भी अटेंडेंस न लगाने पर नोटिस जारी किया गया।
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देवतादीन कोल: शासकीय उच्चतर माध्यमिक स्कूल खर्रा में तैनात ये शिक्षक साल 2023 में ही मृत हो चुके थे, फिर भी इन्हें नोटिस भेजा गया।
नोटिस में साफ लिखा है कि अगर तीन दिन के अंदर ई-अटेंडेंस न लगाने का कारण स्पष्ट नहीं किया गया, तो वेतन काट लिया जाएगा। MP Crime की यह घटना न केवल मृतक शिक्षकों के परिवारों का अपमान है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि सरकारी सिस्टम में पारदर्शिता की कमी है।
क्या मृत शिक्षकों को मिल रहा था वेतन?
इस नोटिस के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि इन शिक्षकों की मौत की सूचना विभाग में दर्ज थी, तो उनके वेतन-भत्ते को लेकर अब तक क्या प्रक्रिया चल रही थी?
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भुगतान की आशंका: नोटिस जारी होने से इस बात की आशंका बढ़ गई है कि या तो मृत शिक्षकों का रिकॉर्ड अभी तक अपडेट नहीं किया गया था, या फिर उनके नाम पर अभी भी वेतन जारी किया जा रहा था।
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अधिकारी झाड़ रहे पल्ला: मामला मीडिया में आने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी अब इसे विभागीय गलती करार दे रहे हैं और इसमें सुधार करवाने की बात कह रहे हैं।
यह पूरा घटनाक्रम MP Crime के तहत एक गंभीर प्रशासनिक और वित्तीय अनियमितता की ओर इशारा करता है, जिस पर उच्च स्तरीय जाँच की आवश्यकता है। सरकारी सिस्टम की इस तरह की लापरवाही प्रदेश की छवि को धूमिल करती है।