मुंबई को महाराष्ट्र से कभी अलग नहीं किया जाएगा: सीएम फडणवीस को विधानसभा में क्यों देनी पड़ी ये गारंटी?
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महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राज्य विधानसभा में स्पष्ट रूप से कहा कि मुंबई को महाराष्ट्र से अलग करने का कोई सवाल ही नहीं है। उन्होंने यह बयान उन चर्चाओं और आशंकाओं को खारिज करने के लिए दिया जो अक्सर चुनाव के दौरान मुंबई को महाराष्ट्र से अलग करने की अटकलों के रूप में उठती हैं।
मुंबई की अविभाज्यता पर जोर
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ऐतिहासिक संदर्भ: मुख्यमंत्री ने कहा कि महाराष्ट्र 106 शहीदों द्वारा बनाया गया एक एकजुट और ताकतवर राज्य है।
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गारंटी: उन्होंने दृढ़ता से कहा, "मुंबई कल भी महाराष्ट्र का था, आज भी महाराष्ट्र का है, और जब तक सूरज और चांद रहेंगे, मुंबई महाराष्ट्र का हिस्सा रहेगा।"
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राजनीतिक टिप्पणी: उन्होंने कहा कि जब भी चुनाव आते हैं, मुंबई के अलगाव की बातें उठती हैं, लेकिन लोगों को इस पर शक नहीं करना चाहिए।
शिवाजी महाराज और संविधान के सिद्धांत
देवेंद्र फडणवीस ने महाराष्ट्र के सिद्धांतों पर भी जोर दिया:
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महाराष्ट्र छत्रपति शिवाजी महाराज के दिखाए रास्ते पर चलता रहेगा।
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राज्य उनके सिद्धांतों और भारत रत्न डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर द्वारा दिए गए संविधान के रास्ते पर चलेगा।
CBSE सिलेबस में छत्रपति शिवाजी का इतिहास बढ़ा
मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय स्तर पर छत्रपति शिवाजी महाराज के इतिहास को लेकर फैली गलतफहमियों को दूर करने की दिशा में हुए महत्वपूर्ण बदलाव की जानकारी दी:
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पुरानी स्थिति: CBSE की किताबों में पहले मराठा साम्राज्य और हिंदवी स्वराज्य के बारे में सिर्फ़ एक पैराग्राफ होता था, जबकि मुगलों का इतिहास 17 पन्नों में था।
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बदलाव: केंद्र सरकार ने अब CBSE सिलेबस में छत्रपति शिवाजी महाराज और मराठा साम्राज्य का 21 पन्नों का विस्तृत इतिहास शामिल किया है।
राज्य की अर्थव्यवस्था पर CM का मत
देवेंद्र फडणवीस ने महाराष्ट्र की आर्थिक स्थिति पर भी टिप्पणी की:
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मजबूत अर्थव्यवस्था: उन्होंने दावा किया कि महाराष्ट्र की अर्थव्यवस्था सभी पैमानों पर खरी उतरती है और बड़े राज्यों में मजबूत है।
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राजकोषीय अनुशासन: 'लाडकी बहिन' जैसी योजनाओं और किसानों की मदद के बाद भी, राज्य ने अपने राजकोषीय घाटे को 3% के अंदर रखा है।
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पूंजी निवेश और विदेशी निवेश: महाराष्ट्र ने केंद्र सरकार की उम्मीद से ज़्यादा पूंजी निवेश किया है और विदेशी निवेश के मामले में देश में नंबर वन है।