रांची 100 ग्राम गांजा 30 दिन की सजा: 5 साल तक अदालत में चला केस, आरोपी को सजा सिर्फ 30 दिन; जानें क्यों मिली इतनी कम सजा?

Ranchi 100 Gram Ganja 30 Din Ki Saza: रांची में 100 ग्राम गांजा बरामदगी के केस में NDPS कोर्ट ने आरोपी को 30 दिन की सजा सुनाई। 5 साल तक चला ट्रायल, आरोपी पहले ही न्यायिक हिरासत में बिता चुका था अवधि।

Nov 25, 2025 - 12:51
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रांची 100 ग्राम गांजा 30 दिन की सजा: 5 साल तक अदालत में चला केस, आरोपी को सजा सिर्फ 30 दिन; जानें क्यों मिली इतनी कम सजा?

रांची, झारखंड: झारखंड की राजधानी रांची में 100 ग्राम गांजा बरामदगी का एक केस इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। यह मामला लगभग पाँच साल तक एनडीपीएस (NDPS) विशेष अदालत में चला, और अब अदालत ने आरोपी को दोषी करार देते हुए भी सिर्फ 30 दिन की सजा सुनाई है। अदालत ने माना कि आरोपी विमल भगत पहले ही 30 दिन न्यायिक हिरासत में बिता चुका है, इसलिए उसी अवधि को उसकी सजा मानते हुए उसे रिहा करने का आदेश दिया गया है।


100 ग्राम गांजा बरामदगी का मामला

यह मामला दिसंबर 2020 का है। नगड़ी थाना क्षेत्र के कटहल मोड़ चौक स्थित एक पान दुकान में गांजा और अन्य नशीले पदार्थों की अवैध बिक्री की सूचना पुलिस को मिली थी।

  • बरामदगी: पुलिस टीम ने छापेमारी की और करमटोली गांव निवासी विमल भगत की पान गुमटी से लगभग 20 पुड़िया (कुल करीब 100 ग्राम गांजा) बरामद किया।

  • FIR और गिरफ्तारी: एफएसएल रिपोर्ट में गांजा होने की पुष्टि हुई, जिसके बाद विमल भगत को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।

  • न्यायिक हिरासत: आरोपी 30 दिन न्यायिक हिरासत में रहने के बाद जमानत पर बाहर आ गया था।


लंबा ट्रायल और कम सजा

महज 100 ग्राम गांजा बरामदगी का यह मामला रांची की एनडीपीएस विशेष अदालत में पूरे पाँच वर्ष तक चलता रहा।

  • फैसला: विशेष न्यायाधीश ओंकारनाथ चौधरी ने सुनवाई पूरी करते हुए विमल भगत को दोषी करार दिया।

  • सजा में राहत: कोर्ट ने पाया कि आरोपी का कोई आपराधिक इतिहास नहीं था और उसके पास से बरामद गांजे की मात्रा बहुत कम थी। ऐसे में उसे सुधार का अवसर देना उचित माना गया, और पहले ही बिताए गए 30 दिनों की न्यायिक हिरासत को पर्याप्त सजा मान लिया गया।


वकीलों का मत

वकीलों का कहना है कि अगर आरोपी ने सुनवाई के दौरान ही अपना दोष स्वीकार कर लिया होता, तो वह इतने लंबे समय तक मुकदमे का सामना करने से बच सकता था। आमतौर पर, एनडीपीएस मामलों में आरोपी द्वारा दोष कबूल करने पर कानूनी प्रक्रिया तेज हो जाती है।