सड़क सुरक्षा पर राष्ट्रीय उपाध्यक्ष का भावुक आह्वान: “दो मिनट रुक जाइए… कोई आपका इंतज़ार कर रहा है”
राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा आयोग के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुरेश कुमार शर्मा ने सड़क सुरक्षा को लेकर देशव्यापी अभियान की शुरुआत का आह्वान किया। उन्होंने चलती बाइक पर मोबाइल इस्तेमाल न करने और ट्रैफिक नियमों का पालन करने की भावुक अपील की।
ब्यूरो चीफ: मनीष कुमार द्विवेदी
राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा आयोग के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुरेश कुमार शर्मा ने देशभर में सड़क सुरक्षा को लेकर एक भावुक और जिम्मेदारी से भरा संदेश जारी किया है। उन्होंने आयोग से जुड़े सभी पदाधिकारियों और देश के नागरिकों से अपील की है कि सड़क सुरक्षा को व्यक्तिगत संकल्प बनाते हुए एक राष्ट्रव्यापी जनजागरूकता अभियान शुरू किया जाए।
उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है जब केवल पत्रकार ही नहीं, बल्कि देश का हर नागरिक ट्रैफिक नियमों के पालन को अपनी जिम्मेदारी समझे और पुलिस विभाग का पूरा सहयोग करे।
“चलती बाइक पर मोबाइल नहीं… जिंदगी पहले”
सुरेश कुमार शर्मा ने बेहद सरल शब्दों में एक गहरी बात कही। उन्होंने अपील की कि कोई भी व्यक्ति चलती हुई बाइक या वाहन चलाते समय मोबाइल फोन पर बात न करे।
उन्होंने कहा, “सिर्फ दो मिनट रुक जाइए… अपनी बाइक को किनारे लगाइए, फिर फोन रिसीव कीजिए। सामने वाले से कहिए—अगर बहुत जरूरी है तो बताइए, नहीं तो मैं घर पहुंचकर बात करता हूं।”
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि मोबाइल पर दो मिनट की जल्दबाज़ी, जिंदगी भर का पछतावा बन सकती है।
“घर पर कोई आपका इंतज़ार कर रहा है”
अपने संदेश को भावनात्मक रूप देते हुए उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को यह याद रखना चाहिए कि घर पर उसके अपने इंतज़ार कर रहे हैं—मां-बाप, भाई-बहन, बेटा-बेटी। एक छोटी सी लापरवाही पूरे परिवार की खुशियां छीन सकती है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यह संदेश केवल पत्रकारों तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के हर नागरिक के लिए है। सड़क सुरक्षा को जनआंदोलन बनाने की जरूरत है।
पुलिस विभाग को मिलेगा सहयोग
राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा आयोग के पदाधिकारियों से अपील करते हुए उन्होंने कहा कि सभी सदस्य अपने-अपने क्षेत्रों में पुलिस विभाग के साथ मिलकर सड़क सुरक्षा जागरूकता अभियान चलाएं। हेलमेट और सीट बेल्ट के अनिवार्य उपयोग, ट्रैफिक नियमों के पालन और मोबाइल के दुरुपयोग के खिलाफ व्यापक जनजागरण किया जाएगा।
बने जनआंदोलन
सुरेश कुमार शर्मा ने कहा कि सड़क सुरक्षा केवल कानून का विषय नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी है। यदि हर व्यक्ति यह संकल्प ले ले कि “चलती गाड़ी में मोबाइल नहीं”, तो हजारों जिंदगियां बचाई जा सकती हैं।
संदेश साफ है—
फोन दो मिनट रुक सकता है,
लेकिन जिंदगी नहीं।
यह पहल अब एक मिशन का रूप ले चुकी है। सवाल सिर्फ नियमों का नहीं, बल्कि जिम्मेदारी और अपने परिवार के सुरक्षि
त भविष्य का है।