उरी हाइड्रो पावर प्लांट ऑपरेशन सिंदूर: देश के लिए कितना अहम है यह प्रोजेक्ट? पाकिस्तान ने किया था टारगेट, नाकाम होने पर ब्लैकआउट का था खतरा
Uri Hydro Power Plant Operation Sindoor: ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान ने उरी हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट को निशाना बनाया। सुरक्षा बलों ने नाकाम किया हमला। LOC के पास 720 MW क्षमता वाला यह प्लांट देश के लिए अहम।
श्रीनगर/जम्मू-कश्मीर: ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान की तरफ से भारत के संवेदनशील उरी हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट को निशाना बनाने की कोशिश की गई, जिसे देश के सुरक्षा बलों की जबरदस्त सक्रियता की वजह से नाकाम कर दिया गया। यह हाइड्रो प्रोजेक्ट्स नियंत्रण रेखा (LOC) से महज कुछ ही किलोमीटर की दूरी पर जम्मू और कश्मीर के बारामूला जिले के उरी शहर में झेलम नदी पर स्थित हैं।
सीआईएसएफ के अधिकारियों के बयान के मुताबिक, पाकिस्तान की तरफ से पहलगाम हमले के बाद इन प्लांट्स को तबाह करने की नाकाम कोशिश की गई थी, लेकिन सुरक्षा बलों ने मुंहतोड़ जवाब दिया।
???????? भारत के लिए क्यों हैं ये हाइड्रो प्रोजेक्ट्स अहम?
उरी क्षेत्र में दो चालू हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर प्लांट हैं— उरी-I हाइड्रो प्रोजेक्ट और उरी-II हाइड्रो प्रोजेक्ट।
| प्रोजेक्ट का नाम | कमीशन वर्ष | इंस्टॉल्ड कैपेसिटी | यूनिट साइज़ |
| उरी-I हाइड्रो प्रोजेक्ट | 1997 | 480 मेगावाट | 120 मेगावाट की 4 यूनिट |
| उरी-II हाइड्रो प्रोजेक्ट | 2014 | 240 मेगावाट | 60 मेगावाट की 4 यूनिट |
| कुल क्षमता | - | 720 मेगावाट | - |
इनका मालिकाना हक केंद्र सरकार के पास है और इन्हें नेशनल हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (NHPC) चलाता है। NHPC का काम भारत और विदेश में बिजली के सभी पहलुओं के विकास की प्लानिंग करना है।
नुकसान पहुंचने पर क्या आतीं मुश्किलें?
यह हाइड्रो प्रोजेक्ट्स LOC के बेहद पास होने के कारण रणनीतिक रूप से संवेदनशील हैं। पाकिस्तान इन्हें निशाना इसलिए बनाना चाहता था, क्योंकि इन्हें नुकसान पहुंचने पर:
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ब्लैकआउट का खतरा: जम्मू-कश्मीर में आवश्यकता के मुताबिक बिजली प्रोडक्शन नहीं हो पाता है। ऐसे में इन पावर प्लांट्स को नुकसान पहुंचने पर राज्य के करीब 20-30 प्रतिशत का क्षेत्र ब्लैकआउट हो जाता।
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आपूर्ति ठप: बिजली आपूर्ति ठप होने से स्कूल, अस्पताल, उद्योग और अन्य आवश्यक सेवाओं की आपूर्ति में बड़ी समस्या उत्पन्न हो जाती।
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राष्ट्रीय कनेक्शन: ये हाइड्रो प्रोजेक्ट्स दूसरे राज्यों की बिजली ट्रांसमिशन के लिए पूरे देश में एक-दूसरे से जुड़े होते हैं, इसलिए इन पर हमला राष्ट्रीय ग्रिड को भी प्रभावित कर सकता था।
झेलम नदी और सहायक नदियां
ये पावर प्लांट्स झेलम नदी पर बने हैं, जो सिंधु नदी की एक सहायक नदी है और कश्मीर घाटी का मुख्य जलमार्ग है।
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किशनगंगा (नीलम): झेलम की सबसे बड़ी सहायक नदी है, जो मुजफ्फराबाद के पास मिलती है और पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में जाती है।
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कुनहर नदी: यह कोहाला ब्रिज पर पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) और पाकिस्तान को जोड़ती है।