Varanasi News: कबीर आदर्श संस्कृत महाविद्यालय में 'शिक्षा माफिया' का कब्जा? फर्जी नियुक्तियों और करोड़ों की वसूली का सनसनीखेज आरोप

वाराणसी के कबीर आदर्श संस्कृत महाविद्यालय में शिक्षा माफियाओं के कब्जे और फर्जी शिक्षक नियुक्तियों के खिलाफ प्रेस कॉन्फ्रेंस। सजायाफ्ता प्रबंधक और 40 लाख की वसूली का आरोप।

Dec 16, 2025 - 20:59
Dec 16, 2025 - 21:02
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Varanasi News: कबीर आदर्श संस्कृत महाविद्यालय में 'शिक्षा माफिया' का कब्जा? फर्जी नियुक्तियों और करोड़ों की वसूली का सनसनीखेज आरोप
Varanasi News: कबीर आदर्श संस्कृत महाविद्यालय में 'शिक्षा माफिया' का कब्जा? फर्जी नियुक्तियों और करोड़ों की वसूली का सनसनीखेज आरोप

वाराणसी। धर्म और शिक्षा की नगरी काशी में एक प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान अब विवादों और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों के घेरे में है। कबीरचौरा स्थित कबीर आदर्श संस्कृत महाविद्यालय को अपराधियों और शिक्षा माफियाओं के चंगुल से मुक्त कराने के लिए आज एक प्रेस वार्ता आयोजित की गई। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में संस्था से जुड़े पदाधिकारियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने विद्यालय के भीतर चल रहे भ्रष्टाचार का कच्चा चिट्ठा खोला।

सजायाफ्ता व्यक्ति को प्रबंधक बनाने का आरोप

प्रेस वार्ता में सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह किया गया कि कबीर महाविद्यालय समूह के अंतर्गत संचालित इस कॉलेज में एक ऐसे व्यक्ति को अवैध रूप से प्रबंधक बनाया गया है, जिसे दो आपराधिक मामलों में सजा मिल चुकी है।

वक्ताओं ने आरोप लगाया कि नियमों की धज्जियाँ उड़ाते हुए फर्जी दस्तावेजों के आधार पर यह पद हथियाया गया है। संस्था के नियमानुसार, कोई भी दंडित या सजायाफ्ता व्यक्ति प्रबंधन समिति का सदस्य नहीं बन सकता, फिर भी यहाँ न केवल प्रबंधक बल्कि अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और कोषाध्यक्ष जैसे पदों पर भी फर्जी नियुक्तियां की गई हैं।

शिक्षक नियुक्ति के नाम पर ₹4 करोड़ की 'सेटिंग'!

कॉलेज में प्रस्तावित शिक्षकों की नियुक्तियों को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया गया कि:

  • लगभग 10 पदों पर नियुक्तियां होनी हैं, जिनके लिए पहले ही करोड़ों रुपये की सेटिंग की जा चुकी है।

  • आरोप है कि प्रति पद 30 से 40 लाख रुपये तक की अवैध वसूली की जा रही है।

  • वक्ताओं ने हैरानी जताई कि जहाँ शास्त्री और आचार्य पाठ्यक्रमों में छात्र संख्या न के बराबर है, वहाँ इतनी तेजी से शिक्षकों की भर्ती करना दाल में काला होने का स्पष्ट संकेत है।

विश्वविद्यालय प्रशासन और प्रशासन की चुप्पी पर सवाल

सामाजिक कार्यकर्ताओं ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि इस पूरे घोटाले की जानकारी विश्वविद्यालय प्रशासन, कुलपति, कुलसचिव और सहायक रजिस्ट्रार (सोसायटी) को कई बार दी गई है। इसके बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई न होना शिक्षा व्यवस्था की साख पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगाता है। जाली दस्तावेजों और फर्जी हस्ताक्षरों के सहारे पूरी समिति का गठन कर लिया गया और प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है।

प्रमुख मांगें और आंदोलन की चेतावनी

प्रेस वार्ता के माध्यम से शासन और प्रशासन के सामने तीन मुख्य मांगें रखी गई हैं:

  1. दोषी व्यक्तियों के खिलाफ तत्काल FIR दर्ज की जाए।

  2. महाविद्यालय में चल रही संदिग्ध शिक्षक नियुक्तियों पर तुरंत रोक लगे।

  3. संस्था में निष्पक्ष चुनाव कराकर नई और वैध प्रबंधन समिति बनाई जाए।

चेतावनी: वक्ताओं ने स्पष्ट कहा कि यदि शासन-प्रशासन ने जल्द कार्रवाई नहीं की, तो साधु-संतों और समाज के लोगों द्वारा उग्र आंदोलन और धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।