Varanasi News: महामना मदन मोहन मालवीय की 164वीं जयंती पर काशी में उमड़ी श्रद्धा; राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान को किया याद
वाराणसी में महामना मालवीय मिशन द्वारा पंडित मदन मोहन मालवीय की 164वीं जयंती मनाई गई। मुख्य अतिथि प्रो. हरिकेश सिंह ने मालवीय जी के राष्ट्र निर्माण में योगदान पर प्रकाश डाला।
वाराणसी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय के संस्थापक और भारत रत्न पंडित मदन मोहन मालवीय जी की 164वीं जयंती बुधवार को धर्मनगरी काशी में अत्यंत श्रद्धा और गरिमा के साथ मनाई गई। महामना मालवीय मिशन (शहर इकाई), वाराणसी के तत्वावधान में आयोजित इस समारोह ने नई पीढ़ी को महामना के आदर्शों और उनके द्वारा स्थापित मूल्यों से जोड़ने का कार्य किया।
BHU कुलगीत और पुष्पांजलि से हुआ शुभारंभ
कार्यक्रम का आरंभ प्रातः 11 बजे भव्य मंच सज्जा और दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। अतिथियों का स्वागत काशी हिंदू विश्वविद्यालय के गौरवशाली कुलगीत और पुष्पगुच्छ भेंट कर किया गया। महामना मालवीय मिशन शहर इकाई के संगठन मंत्री श्री ओम प्रकाश शुक्ला ने स्वागत भाषण के माध्यम से सभी आगंतुकों का अभिनंदन किया।
पांच विशिष्ट विभूतियों का हुआ सम्मान
इस अवसर पर समाज के विभिन्न क्षेत्रों—शिक्षा, समाज सेवा और संस्कृति में उल्लेखनीय योगदान देने वाले पांच विशिष्ट व्यक्तियों को सम्मानित किया गया। उन्हें प्रशस्ति पत्र प्रदान कर उनके प्रयासों की सराहना की गई। शिक्षा आयोग के सदस्य डॉ. हरेन्द्र राय ने विषय प्रवर्तन करते हुए संस्था के उद्देश्यों और मालवीय जी के शिक्षा दर्शन पर विस्तार से प्रकाश डाला।
राष्ट्र निर्माण और सामाजिक समरसता पर मंथन
वक्ता सत्र के दौरान विद्वानों ने महामना के विराट व्यक्तित्व पर चर्चा की:
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प्रो. हरिकेश सिंह (मुख्य अतिथि): उन्होंने मालवीय जी को आधुनिक भारत का निर्माता बताते हुए उनके 'स्वदेशी' और 'स्वावलंबन' के विचार को आज के समय में प्रासंगिक बताया।
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प्रो. गुलाब चंद्र जायसवाल (विशिष्ट अतिथि) व प्रो. अरविंद जोशी: वक्ताओं ने महामना के सामाजिक समरसता और अखंड भारत के संकल्प को रेखांकित किया।
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श्री हर्ष सिंह (अध्यक्ष, मिशन शहर इकाई): उन्होंने महामना के आदर्शों को जन-जन तक पहुँचाने का संकल्प दोहराया।
वंदेमातरम् के साथ गरिमामय समापन
कार्यक्रम के अंत में मंचासीन अतिथियों को स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया गया। धन्यवाद ज्ञापन कोषाध्यक्ष विपिन शंकर गुप्ता ने किया। समारोह का औपचारिक समापन 'वंदेमातरम्' के साथ हुआ, जिसके पश्चात उपस्थित सभी प्रबुद्ध जनों के लिए मध्याह्न भोज का आयोजन किया गया।
वाराणसी की इस पावन धरा पर महामना की जयंती ने एक बार फिर उनके द्वारा रोपित शिक्षा और संस्कार के बीज को पुष्पित करने का संदेश दिया।