एम्स नेशनल मॉर्चरी प्रोटोकॉल: 'गरिमा के साथ परिवार को सौंपा जाए पार्थिव शरीर', एम्स तैयार कर रहा नया प्रोटोकॉल; देश में नेशनल मॉर्चरी बनाने की चर्चा
AIIMS National Mortuary Protocol: एम्स ने डेडबॉडी को सम्मानजनक तरीके से परिजनों को सौंपने के लिए नया प्रोटोकॉल तैयार किया। बॉडी का पुनर्निर्माण और नेशनल मॉर्चरी बनाने पर चर्चा।
नई दिल्ली: हाल के वर्षों में बड़ी आपदाओं और अज्ञात कारणों से होने वाली मौतों के मामलों में, क्षत-विक्षत पार्थिव शरीरों को उनके परिजनों को सम्मानजनक तरीके से सौंपना एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आई है। इस मानवीय पहलू को ध्यान में रखते हुए, ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (AIIMS) नई दिल्ली ने एक विशेष प्रोटोकॉल तैयार किया है, जिसका उद्देश्य मृत व्यक्ति के शरीर का तकनीकी रूप से पुनर्निर्माण (Reconstruction) करना है।
एम्स के फॉरेंसिक साइंस के प्रमुख डॉ. सुधीर गुप्ता ने बताया कि देश में जल्द ही नेशनल मॉर्चरी बनाने पर भी विचार चल रहा है, जहाँ एक साथ 400 से 500 डेड बॉडी को संरक्षित किया जा सके।
क्षत-विक्षत बॉडी का पुनर्निर्माण
डॉ. सुधीर गुप्ता ने बताया कि उनका मुख्य लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि परिजनों को उनके प्रियजनों के पार्थिव शरीर बेहतर हालात में सौंपे जाएं, भले ही दुर्घटना में मानव शरीर क्षत-विक्षत हो गया हो।
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तकनीक: आमतौर पर यदि किसी दुर्घटना, विशेषकर बम ब्लास्ट में, किसी व्यक्ति का चेहरा खराब हो जाता है, तो उसे उसी शेप में लाने के लिए कई तरह की सर्जरी और तकनीकी प्रक्रियाएं की जाती हैं।
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समय: डॉ. सुधीर गुप्ता के अनुसार, चेहरे या शरीर के प्रमुख हिस्सों का पुनर्निर्माण करने में करीब 14 घंटे तक लग जाते हैं।
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चुनौती: ब्लास्ट के केस में कई लोगों के बॉडी पार्ट्स का एक-दूसरे से जुड़ जाना एक कठिन चुनौती होती है, जिसमें कुशल तकनीक की जरूरत होती है।
पार्थिव शरीर का संरक्षण और नेशनल मॉर्चरी
डॉ. गुप्ता ने पार्थिव शरीर को संरक्षित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया, ताकि अधिक समय तक बॉडी सुरक्षित रह सके।
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इम्बामिंग: इसके लिए इम्बामिंग (Embalming) से लेकर तरह-तरह की तकनीकी प्रक्रिया को अपनाया जाता है।
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बॉडी पार्ट मैचिंग: उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ब्लास्ट के केस में अक्सर एक बॉडी पार्ट की डीएनए मैचिंग एक अस्पताल में, तो दूसरे पार्ट की किसी और अस्पताल में होती है। इसे रोकने के लिए, सभी बॉडी पार्ट को एक ही अस्पताल में लाया जाना जरूरी है।
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नेशनल मॉर्चरी: बड़े हादसे (प्लेन क्रैश, ट्रेन एक्सीडेंट) की स्थिति में, एक साथ 400 से 500 डेड बॉडी को रखने और संरक्षित करने के लिए नेशनल मॉर्चरी बनाने पर विचार हो रहा है। उन्होंने बताया कि दुनिया में ऑस्ट्रेलिया में इस तरह का मॉर्चरी सिस्टम मौजूद है।