सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ेगा '2026 हिन्दी पंचांग': अखिल भारतीय चौरसिया महासभा ने वाराणसी में किया पाँचवाँ लोकार्पण
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वाराणसी। 14 दिसंबर 2025
अखिल भारतीय चौरसिया महासभा ने समाज को भारतीय संस्कृति और परंपराओं से जोड़े रखने के उद्देश्य से वर्ष 2026 के हिन्दी पंचांग (कैलेंडर) का पाँचवाँ लोकार्पण समारोह आयोजित किया। यह भव्य कार्यक्रम सोमवार को वाराणसी के होटल शिवाय ग्रैंड, सोनारपुरा, शिवाला रोड में सौहार्दपूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुआ।
समारोह में महासभा के वरिष्ठ पदाधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और गणमान्य नागरिकों ने बड़ी संख्या में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
मुख्य अतिथि और नेतृत्व
कार्यक्रम में संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष माननीय प्रदीप चौरसिया ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। विशिष्ट अतिथि के तौर पर माननीय सुधीर चौरसिया उपस्थित रहे।
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अध्यक्षता: प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अजय चौरसिया ने समारोह की अध्यक्षता की।
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संचालन: कार्यक्रम का सफल संचालन महानगर अध्यक्ष सोहनलाल चौरसिया ने किया।
एकता और संस्कृति पर जोर
अपने संबोधन में, वक्ताओं ने महासभा के इस प्रयास की सराहना की और इसके महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि:
"हिन्दी पंचांग समाज को सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ने का एक सशक्त माध्यम है। इसके माध्यम से नई पीढ़ी को परंपराओं, तिथियों और समृद्ध भारतीय संस्कृति की जानकारी मिलती है।"
नेताओं ने इस अवसर पर समाज की एकता, संगठन की मजबूती और सामाजिक सहभागिता को बढ़ावा देने पर भी विशेष जोर दिया।
सम्मान और उपस्थिति
समारोह के दौरान, समाज में उल्लेखनीय योगदान देने वाले पदाधिकारियों और वरिष्ठजनों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में निम्नलिखित प्रमुख सदस्य और बड़ी संख्या में समाज के लोग उपस्थित रहे:
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संरक्षक: कृष्ण मोहनदास चौरसिया
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राष्ट्रीय महिला महासचिव: श्रीमती गणेशनी जी
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अन्य प्रमुख पदाधिकारी: अध्यक्ष श्यामा देवी, प्रीति , अंजनी चौरसिया, पूर्व पार्षद कृष्ण चौरसिया, महामंत्री अनूप चौरसिया, उपाध्यक्ष विजय चौरसिया, अवधेश चौरसिया, अवनीश चौरसिया, कोषाध्यक्ष गणेश चौरसिया, गौरव चौरसिया, अमित चौरसिया, सुमित चौरसिया, दीपक चौरसिया, रितेश चौरसिया, रवि चौरसिया, विकाश चौरसिया, कुंज बिहारी चौरसिया, सनील चौरसिया, मनीष चौरसिया, सुनील चौरसिया, चन्द्रमोहन चौरसिया, बाबूलाल चौरसिया, और चंचल चौरसिया।
अंत में, धन्यवाद ज्ञापन के साथ समारोह का सफलतापूर्वक समापन किया गया, जो महासभा की संगठनात्मक सक्रियता को दर्शाता है।