Varanasi News: मकर संक्रांति पर 'नादान परिंदे साहित्य मंच' और 'पैपरिका रेस्टोरेंट' की अनूठी पहल; खिचड़ी व हलवा खिलाकर मनाई खुशियां
वाराणसी के लंका में मकर संक्रांति पर नादान परिंदे साहित्य मंच और पैपरिका रेस्टोरेंट द्वारा खिचड़ी व हलवा वितरण किया गया। डॉ. सुबाष चन्द्र ने बताया खिचड़ी का महत्व।
वाराणसी। मकर संक्रांति के पावन पर्व पर धर्मनगरी काशी में सेवा और दान की परंपरा को जीवंत रखते हुए लंका स्थित शिव शक्ति कॉम्प्लेक्स में एक भव्य भंडारे का आयोजन किया गया। नादान परिंदे साहित्य मंच और पैपरिका रेस्टोरेंट के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में राहगीरों और जरूरतमंदों के बीच स्वास्थ्यवर्धक खिचड़ी और विशेष हलवे का वितरण किया गया।
स्वास्थ्य और परंपरा का संगम
संस्था के संस्थापक और वरिष्ठ समाजसेवी डॉ. सुबाष चन्द्र एवं पैपरिका रेस्टोरेंट के अधिष्ठाता प्रतीक जायसवाल व आदित्य जायसवाल के नेतृत्व में देसी घी युक्त सब्जियों वाली खिचड़ी (तहरी) तैयार कराई गई थी। इसके साथ ही कड़ाके की ठंड को देखते हुए स्वास्थ्य लाभ के उद्देश्य से पौष्टिक वस्तुओं से निर्मित गर्मागर्म हलवा भी परोसा गया।
क्यों महत्वपूर्ण है खिचड़ी का दान?
इस अवसर पर समाजसेवी डॉ. सुबाष चंद्र ने खिचड़ी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा— "मकर संक्रांति की भीषण ठंड में खिचड़ी शरीर को आवश्यक ऊर्जा और पोषण देती है। दाल, चावल और घी का यह मिश्रण सुपाच्य होने के साथ-साथ पाचन शक्ति को भी मजबूत करता है। खिचड़ी का दान सामाजिक समरसता और करुणा का प्रतीक है।"
इस दौरान डॉ. सुबाष चंद्र ने अपनी कविता की पंक्तियों के माध्यम से उत्साह भरते हुए कहा:
"मेरे हौसले में जान अभी बाकी है, यह तो दौड़ भर थी उड़ान अभी बाकी है। मेरी सादगी के बारे में अंदाजा मत लगाना, यह तो शुरुआत भर थी अंजाम अभी बाकी है।"
![]()
साहित्यकारों और समाजसेवियों की गरिमामयी उपस्थिति
सेवा के इस महायज्ञ में समाज के विभिन्न क्षेत्रों की हस्तियां शामिल हुईं। कार्यक्रम में मुख्य रूप से संरक्षक प्रकाश कुमार श्रीवास्तव 'गणेश जी', कोषाध्यक्ष झरना मुखर्जी, वरिष्ठ कवि सिद्धनाथ शर्मा, सरोजनी महापात्रा, वत्सला श्रीवास्तव, गिरीश पांडे 'काषिकेय', बृजेश पाठक, श्रीकांत पाण्डेय, सुनील सिंह राजपूत, डॉ. कैलाश विकास, काली शंकर उपाध्याय और डॉ. एकता गुप्ता आदि उपस्थित रहे।