दिल्ली क्राइम 2 साल की बच्ची से रेप: दिवाली की पूर्व संध्या पर जघन्य अपराध; जांच और ट्रायल महज एक महीने में पूरा, दोषी को 25 साल की कठोर कैद
Delhi Crime 2 Saal Ki Bacchi Se Rape: तीस हजारी कोर्ट ने 2 साल की बच्ची से डिजिटल दुष्कर्म के दोषी को POCSO एक्ट के तहत 25 साल की कठोर कैद सुनाई। जांच-ट्रायल महज एक महीने में पूरा हुआ।
नई दिल्ली: दिल्ली के तीस हजारी कोर्ट ने एक ऐतिहासिक और त्वरित फैसला सुनाते हुए 2 साल की मासूम बच्ची से डिजिटल दुष्कर्म के दोषी को पॉक्सो एक्ट के तहत 25 साल की कठोर कारावास की सज़ा सुनाई है। इस जघन्य अपराध को दिवाली की पूर्व संध्या पर अंजाम दिया गया था, जिसने पीड़िता के जीवन को अंधकारमय बना दिया।
कोर्ट ने इस मामले में न केवल कठोर सज़ा दी है, बल्कि पीड़िता को 13.5 लाख रुपये मुआवजा देने का भी आदेश दिया है। इस मामले की सबसे बड़ी बात यह रही कि पुलिस ने महज कुछ दिनों में जांच पूरी कर चार्जशीट जमा कर दी, और कोर्ट ने केवल 9 दिन में ट्रायल पूरा कर लिया।
मासूम की जिंदगी को अंधकार में धकेलने वाला
एडिशनल सेशन जज बबीता पुनिया की कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए इस अपराध को "जघन्य" करार दिया।
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अपराध: बच्ची के साथ डिजिटल दुष्कर्म की यह घटना इसी साल दिवाली की पूर्व संध्या यानी 19 अक्टूबर को हुई थी। आरोपी, 30 वर्षीय व्यक्ति, पीड़िता के पिता का परिचित था।
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असुरक्षित घर: न्यायाधीश ने कहा कि बच्ची अपने घर जैसी सबसे सुरक्षित जगह पर थी, लेकिन आरोपी ने उसी घर को उसके लिए भय का स्थान बना दिया।
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कानून की सख्ती: कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कानून डिजिटल प्रवेश और लिंग प्रवेश में कोई अंतर नहीं मानता है, और नशे की हालत में एक मासूम की जिंदगी अंधकार में धकेलने वाला व्यक्ति दया का पात्र नहीं हो सकता।
रिकॉर्ड समय में न्याय: सिर्फ एक महीने में सजा
दिल्ली क्राइम 2 साल की बच्ची से रेप मामले में न्याय की प्रक्रिया ने रिकॉर्ड गति पकड़ी।
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तुरंत गिरफ्तारी: 20 अक्टूबर को निहाल विहार थाने में FIR दर्ज होते ही पुलिस ने आरोपी को तुरंत गिरफ्तार कर लिया था।
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फास्ट ट्रैक प्रक्रिया: महज कुछ ही दिनों में जांच पूरी हुई और चार्जशीट जमा की गई। कोर्ट ने 19 नवंबर को पॉक्सो एक्ट की धारा 6 के तहत दोषी ठहराया और अगले ही दिन (20 नवंबर) सज़ा सुना दी।
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सजा: दोषी को 25 साल की कठोर कारावास के साथ 13.5 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया गया है।
यह त्वरित न्याय प्रणाली समाज में ऐसा संदेश देती है कि मासूमों के साथ जघन्य अपराध करने वालों को कानून जल्द से जल्द और कठोरतम सज़ा देगा।