धर्म के लिए छोड़ी लग्ज़री लाइफ: डायमंड, महंगी घड़ियों, कारों का शौक़ छोड़ 18 साल के जश मेहता बनेंगे जैन मुनि; जानें कितनी कठिन होती है ये तपस्या

धर्म का कठिन मार्ग: 18 साल के डायमंड कारोबारी के बेटे जश मेहता ने छोड़ी लग्जरी लाइफ, 23 नवंबर को बनेंगे जैन मुनि। जानें जैन धर्म की कठिन तपस्या और त्याग।

Nov 19, 2025 - 16:42
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धर्म के लिए छोड़ी लग्ज़री लाइफ: डायमंड, महंगी घड़ियों, कारों का शौक़ छोड़ 18 साल के जश मेहता बनेंगे जैन मुनि; जानें कितनी कठिन होती है ये तपस्या

सूरत: गुजरात के एक जाने-माने डायमंड इंडस्ट्रियलिस्ट के 18 वर्षीय बेटे जश मेहता ने अपनी लग्जरी भरी ज़िंदगी और तमाम ऐशो-आराम को त्यागकर जैन मुनि बनने का कठिन रास्ता चुना है। 23 नवंबर को दीक्षा ग्रहण कर जश, यशोविजय सुरेश्वरजी महाराज के मार्गदर्शन में धर्म के मार्ग पर अग्रसर होंगे। यह निर्णय दिखाता है कि सांसारिक सुख-सुविधाओं से ज़्यादा महत्वपूर्ण धर्म और अध्यात्म का मार्ग है।

जश मेहता के इस फ़ैसले ने समाज को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर किस प्रेरणा से एक टीनएजर महंगी घड़ियां, चश्मे, गहने, हाई-एंड कारें और मूल डायमंड ज्वेलरी का शौक छोड़ सकता है। जश ने 10वीं कक्षा में 70% अंक हासिल किए थे और उन्हें क्रिकेट खेलना भी बेहद पसंद था।


पांच साल पहले शुरू हुआ धर्म की ओर झुकाव

जश मेहता के इस त्यागपूर्ण फ़ैसले में उनका परिवार पूरी तरह साथ है। जश की मां ने गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि उनके बेटे ने धर्म का जो रास्ता चुना है, उसमें उनका पूरा समर्थन है।

  • चाचा से प्रेरणा: जश का आध्यात्मिक झुकाव लगभग पांच साल पहले शुरू हुआ। वह अपने चाचा की दीक्षा से बहुत प्रभावित थे। उनके चाचा भी पहले ऐशो-आराम की ज़िंदगी जीते थे, लेकिन एक छोटी सी धार्मिक किताब पढ़ने के बाद उनका जीवन पूरी तरह से बदल गया।

  • सत्य की पहचान: इस बदलाव का जश पर गहरा असर हुआ। उन्होंने महसूस किया कि मृत्यु के बाद भौतिक चीजें किसी का साथ नहीं दे सकतीं, और गुरुदेव के साथ से उन्होंने धीरे-धीरे दुनियावी चीजों से दूरी बना ली, जिससे वह धर्म के कठोर मार्ग पर चलने के लिए तैयार हो गए।


जैन मुनि बनना: धर्म का सबसे कठिन मार्ग

जैन मुनि बनना केवल एक फैसला नहीं, बल्कि धर्म के प्रति पूर्ण समर्पण और एक कठिन तपस्या है। व्यक्ति को सभी सांसारिक जीवन का त्याग करना होता है और धर्म के कठिन नियमों और अनुशासन का पालन करना होता है।

  • पँच महाव्रत: इसमें अहिंसा, सत्य, अचौर्य (चोरी न करना), ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह (संचय न करना) जैसे सिद्धांत शामिल हैं।

  • दीक्षा: जैन मुनि बनने के लिए व्यक्ति को जैन धर्म की शिक्षा और शास्त्रों का ज्ञान होना जरूरी है और एक आचार्य के पास जाकर दीक्षा ग्रहण करनी होती है।

  • कठोर जीवनशैली: दीक्षा के बाद मुनि बनने वाले व्यक्ति सिर्फ दिन में एक बार ही भोजन ग्रहण करते हैं। वे दातून, मंजन, बेड जैसी चीजें त्यागकर जमीन पर सोते हैं

  • तीन आवश्यक वस्तुएं: एक मुनि के पास हमेशा तीन चीजें रहती हैं—कमंडल, शास्त्र और पिच्छी—जो उनके धर्म के प्रतीक हैं।

जश मेहता का यह समर्पण आज के युवाओं के लिए एक बड़ा उदाहरण है, जो उन्हें धर्म और अध्यात्म के महत्व को समझने के लिए प्रेरित करता है।