बीएचयू के आईयूसीटीई में सात दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन

बीएचयू के आईयूसीटीई में आयोजित “द एडटेक कनेक्ट: एम्पावरिंग द ग्लोबल साउथ” विषय पर सात दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन, 12 देशों के 25 शिक्षकों ने लिया हिस्सा।

Mar 15, 2026 - 17:37
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बीएचयू के आईयूसीटीई में सात दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन

वाराणसी से अश्वनी सेठ की रिपोर्ट

वाराणसी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय के अन्तर विश्वविद्यालय अध्यापक शिक्षा केन्द्र (आईयूसीटीई) में आयोजित सात दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम “द एडटेक कनेक्ट: एम्पावरिंग द ग्लोबल साउथ” का रविवार को सफल समापन हो गया। समापन सत्र का शुभारंभ मंगलाचरण के साथ मां सरस्वती एवं महामना पं. मदन मोहन मालवीय की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर तथा दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (टीआईएसएस), मुंबई के कुलाधिपति एवं विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. डी. पी. सिंह रहे, जबकि विशिष्ट अतिथि काशी हिंदू विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अजीत कुमार चतुर्वेदी उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता आईयूसीटीई के निदेशक प्रो. प्रेम नारायण सिंह ने की।

कार्यक्रम की शुरुआत में प्रो. आशीष श्रीवास्तव ने अतिथियों का स्वागत करते हुए सात दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की। इस दौरान कुछ प्रतिभागियों ने भी अपने अनुभव साझा किए। इसके पश्चात मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथि और अन्य अतिथियों द्वारा सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। कार्यक्रम का संचालन डॉ. राजा पाठक, सहायक आचार्य, आईयूसीटीई ने किया।

अपने संबोधन में मुख्य अतिथि प्रो. डी. पी. सिंह ने शिक्षा के क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के नैतिक उपयोग पर जोर देते हुए कहा कि तकनीक के बढ़ते प्रभाव के बावजूद शिक्षण प्रक्रिया में शिक्षक की भूमिका सदैव महत्वपूर्ण बनी रहेगी। उन्होंने कहा कि तकनीक का अंतिम उद्देश्य “सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय” के सिद्धांत को साकार करना होना चाहिए।

वहीं विशिष्ट अतिथि प्रो. अजीत कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि भारत में प्राचीन काल से ही ज्ञान और शिक्षा की समृद्ध परंपरा रही है। उन्होंने बताया कि आज उसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए देश फिनटेक और एडटेक जैसे उभरते क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दे रहा है। उन्होंने आईयूसीटीई और कार्यक्रम में शामिल सभी प्रतिभागियों को बधाई भी दी।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए आईयूसीटीई के निदेशक प्रो. प्रेम नारायण सिंह ने कहा कि भारत ने विश्व को ज्ञान योग और कर्म योग जैसे अमूल्य सिद्धांत प्रदान किए हैं और आज भी शिक्षा के क्षेत्र में भारत की भूमिका महत्वपूर्ण बनी हुई है।

इस अंतर्राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में श्रीलंका, कम्बोडिया, घाना, किर्गिस्तान, मॉरीशस, थाईलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान, ताजिकिस्तान, इथियोपिया और ट्यूनीशिया सहित 12 देशों के 25 शिक्षकों ने भाग लिया। कार्यक्रम के निदेशक प्रो. आशीष श्रीवास्तव रहे, जबकि समन्वयक के रूप में डॉ. राजा पाठक और सह-समन्वयक के रूप में डॉ. सुनील कुमार त्रिपाठी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

इस अवसर पर प्रो. जे. पी. लाल, प्रो. राजनाथ सिंह, प्रो. दीनानाथ सिंह, प्रो. उमेश त्रिपाठी, प्रो. अजय कुमार सिंह सहित अन्य गणमान्य लोग भी उपस्थित रहे। केंद्र के संकाय सदस्यों और कर्मचारियों ने कार्यक्रम के सफल आयोजन में सक्रिय सहयोग दिया।