जया बच्चन पैपाराजी विवाद: 'मैं भी लेखक-पत्रकार की बेटी हूं', पैपाराजी को 'अजीब लोग' बताकर जया बच्चन ने क्या गलत कहा? शुरू हुई नई बहस
Jaya Bachchan Paparazzi Vivaad: जया बच्चन ने पैपाराजी को 'अजीब लोग' कहा। बोलीं- मैं पत्रकार की बेटी हूं, ये लोग सीमाएं लांघते हैं और मेरी डिग्निटी का ख्याल नहीं रखते।
मुंबई: अभिनेत्री और सांसद जया बच्चन एक बार फिर पैपाराजी संस्कृति पर अपने कड़े बयान को लेकर सुर्खियों में हैं। एक हालिया इंटरव्यू में उन्होंने पैपाराजी को 'अजीब लोग' कहा और सवाल उठाया कि ये लोग कहाँ से आते हैं और क्या ये देश का प्रतिनिधित्व करते हैं? जया बच्चन के इस बयान ने सोशल मीडिया पर नई बहस छेड़ दी है, जहाँ एक पक्ष उनकी गरिमा के साथ रहने की इच्छा का समर्थन कर रहा है, तो वहीं दूसरा पक्ष इसे पैपाराजी के काम की आज़ादी पर हमला बता रहा है।
जया बच्चन ने स्पष्ट कहा, "मैं भी पत्रकार की बेटी हूं… मेरे पिता भी लेखक थे," और वह मीडिया के साथियों का बहुत आदर करती हैं, लेकिन पैपाराजी से उनके संबंध जीरो हैं।
'गंदे और टाइट पैंट पहने लोग' पर जया का गुस्सा
जया बच्चन पब्लिक फोरम पर हमेशा अनुशासन और गरिमा (Decorum) की हिमायती रही हैं।
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आपत्तिजनक लोग: उन्होंने कहा कि ये पैपाराजी 'बहुत ही अजीब और खराब कपड़े पहने लोग' होते हैं जो बाहर खड़े होकर मोबाइल से केवल फोटो खींचते हैं और उन पर अजीबोगरीब कमेंट्स भी करते हैं।
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प्रतिनिधित्व पर सवाल: उन्होंने कहा, "क्या इन्हें ट्रेन किया गया है कि ये देश के लोगों की अगुवाई करें? क्या वो सिर्फ इसलिए हमारा प्रतिनिधित्व करेंगे, क्योंकि उनके हाथ में फोन है?"
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सोशल मीडिया पर बेपरवाह: जया ने कहा कि वह सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ फैलाई जाने वाली नफरत से बेपरवाह रहती हैं और इसीलिए वह सोशल मीडिया पर नहीं हैं।
'एयरपोर्ट पर पोज देना पड़े तो किस तरह की सेलिब्रिटी?'
जया बच्चन ने उन सितारों पर भी सवाल उठाया जो पब्लिसिटी के लिए पैपाराजी को बुलाते हैं।
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दो टूक जवाब: उन्होंने साफ शब्दों में कहा, "अगर एयरपोर्ट पर पैपाराजी बुलाना पड़े तो आप किस तरह की सेलिब्रिटी हैं, ये सोचना पड़ेगा।"
कौन थे जया बच्चन के पिता?
जया बच्चन के पिता का नाम तरुण कुमार भादुड़ी था।
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पहचान: वह अपने समय के जाने-माने लेखक-पत्रकार और कवि थे।
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पत्रकारिता: वह भोपाल में अंग्रेजी अखबार स्टेट्समैन के रिपोर्टर थे और खोजी पत्रकार माने जाते थे।
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प्रसिद्ध रचना: उनके पिता ने चंबल के बीहड़ों में डकैतों के जीवन पर बांग्ला में किताब 'अभिशप्त चंबल' भी लिखी थी।
हालांकि निर्देशक अशोक पंडित जैसे फिल्ममेकर्स ने कहा है कि पैपाराज़ी मेहनती पेशेवर हैं, लेकिन जया बच्चन का मानना है कि उनकी गरिमा का उल्लंघन नहीं होना चाहिए।