पश्चिम बंगाल SIR फॉर्म: कहाँ गए 10 लाख से अधिक वोटर्स? SIR फॉर्म वापस न आने पर CEO ने दिया जवाब, बताया- डुप्लीकेट या मृत हैं मतदाता

Paschim Bengal SIR Form: पश्चिम बंगाल में 10 लाख से अधिक SIR फॉर्म वापस नहीं आए। CEO मनोज कुमार अग्रवाल ने कहा- मतदाता डुप्लीकेट या मृत हैं। BLO की भूमिका की तारीफ की।

Nov 25, 2025 - 11:26
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पश्चिम बंगाल SIR फॉर्म: कहाँ गए 10 लाख से अधिक वोटर्स? SIR फॉर्म वापस न आने पर CEO ने दिया जवाब, बताया- डुप्लीकेट या मृत हैं मतदाता

कोलकाता: पश्चिम बंगाल में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया जोर-शोर से चल रही है, लेकिन 10 लाख से अधिक SIR फॉर्म वापस जमा न होने से चिंता पैदा हो गई है। राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी (CEO) मनोज कुमार अग्रवाल ने इस पर स्पष्टीकरण देते हुए बताया है कि ये फॉर्म इसलिए जमा नहीं हो पाए, क्योंकि या तो वे मतदाता गैर-हाजिर रहे, डुप्लीकेट थे, या उनकी मौत हो चुकी है।

सीईओ अग्रवाल ने कहा कि सोमवार शाम 4 बजे तक कुल 4.55 करोड़ एसआईआर फॉर्म का जमा और डिजिटलाइजेशन का काम पूरा हो चुका है। उन्होंने यह भी बताया कि इस प्रक्रिया में लगे बूथ-लेवल ऑफिसर (BLO) ही इस काम के असली हीरो हैं।


1.35% फॉर्म क्यों नहीं लौटे?

पश्चिम बंगाल SIR फॉर्म वितरण का काम 4 नवंबर को शुरू हुआ था और महज 20 दिनों के अंदर 7.64 करोड़ एसआईआर फॉर्म बांटे जा चुके हैं।

  • लापता फॉर्म: सीईओ अग्रवाल के अनुसार, अब तक 10.33 लाख फॉर्म ऐसे रहे, जिन्हें वापस जमा नहीं कराया गया है।

  • प्रतिशत: यह 'जमा नहीं कराए गए' फॉर्म बांटे गए कुल फॉर्म का महज 1.35 फीसदी है।

  • कारण: इन फॉर्मों के वापस न आने के मुख्य कारण वोटर्स का गैर-हाजिर रहना, डुप्लीकेट होना, उनकी मौत होना या उनका हमेशा के लिए कहीं और चले जाना है।


बीएलओ की तारीफ और सुविधा

पश्चिम बंगाल SIR फॉर्म प्रक्रिया को सफल बनाने के लिए राज्य में 80,600 से अधिक बीएलओ, 8,000 सुपरवाइजर, 3,000 असिस्टेंट इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर्स (AERO) और 294 इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर्स (ERO) को लगाया गया है।

  • प्रशंसा: सीईओ अग्रवाल ने बीएलओ की जमकर तारीफ की और कहा कि वे इस काम के असली हीरो हैं, जो फॉर्मैलिटी पूरी करने के लिए ऑफिस टाइम के बाद भी लगातार काम कर रहे हैं।

  • कनेक्टिविटी: बीएलओ को आ रही इंटरनेट की दिक्कतों को दूर करने के लिए Wi-fi हब बनाए गए हैं, और डीएम, ईआरओ और बीडीओ ऑफिस में हेल्प डेस्क भी स्थापित किए गए हैं।

  • स्वास्थ्य सुरक्षा: सीईओ ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर कोई बीएलओ बीमार पड़ता है, तो जिला मजिस्ट्रेट (DM) उनके मेडिकल केयर के लिए जिम्मेदार हैं। ERO के पास स्टाफ पर ज्यादा बोझ न पड़े, इसके लिए दूसरे BLO को अपॉइंट करने का भी अधिकार है।