SIR ने 45 साल बाद बेटे को मिलाया: लापता बेटे को ढूंढने में पिता ने जमीन तक बेच दी थी; भीलवाड़ा के उदय सिंह की कहानी सुन रो पड़े लोग
SIR Ne 45 Saal Baad Bete Ko Milaya: भीलवाड़ा के उदय सिंह रावत 45 साल बाद SIR प्रक्रिया की वजह से परिवार से मिले। दुर्घटना में याददाश्त चली गई थी। पिता ने बेटे को खोजने में जमीन तक बेच दी थी।
भीलवाड़ा, राजस्थान: जहाँ एक ओर मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर देश में सियासी विरोध हो रहा है, वहीं राजस्थान के भीलवाड़ा जिले से इस प्रक्रिया की एक ऐसी मानवीय और दिल को छू लेने वाली कहानी सामने आई है, जिसने 45 साल से बिछड़े बेटे को उसके परिवार से मिला दिया। करेड़ा थाना क्षेत्र के लक्ष्मीपुरा गांव निवासी उदय सिंह रावत की वापसी पर पूरे गांव ने उनका भव्य स्वागत किया।
45 साल बाद जब बेटा वापस लौटा, तो परिजनों ने उसे घोड़ी पर बैठाकर घर ले गए। वृद्ध माँ की आंखों से खुशी के आंसू निकले और उन्होंने अपने बेटे का माथा चूम लिया।
हादसे में चली गई थी याददाश्त
उदय सिंह रावत वर्ष 1980 में कमाने के लिए घर छोड़कर गुजरात गए थे, जिसके बाद वह कभी नहीं लौटे।
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लापता होने की वजह: उदय सिंह ने बताया कि गुजरात जाते समय एक दोस्त की शादी में दुर्घटना में उनकी याददाश्त चली गई थी। याददाश्त वापस आने में कई साल बीत गए थे, और उन्हें लगा कि परिवार शायद उन्हें पहचान नहीं पाएगा, इसलिए वह वापस नहीं आए।
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पिता का संघर्ष: उदय सिंह के छोटे भाई ने बताया कि उन्हें तलाशने के लिए उनके पिता ने अपनी जमीन-जायदाद तक बेच दी थी, लेकिन वे नहीं मिले।
टीसी लेने स्कूल पहुंचे और मिला परिवार
SIR प्रक्रिया के दौरान जब उदय सिंह को दस्तावेजों की जरूरत पड़ी, तो वह अपने पुराने स्कूल पहुँचे।
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पहचान: उदय सिंह जब SIR के लिए अपने स्कूल में पहचान के लिए टीसी (Transfer Certificate) लेने पहुंचे, तो शिक्षक उन्हें देखकर चौंक गए।
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पुनर्मिलन: स्कूल के प्रधानाचार्य ने तुरंत इसकी सूचना उदय सिंह के परिजनों तक पहुंचाई। परिजनों को पहले यकीन नहीं हुआ, लेकिन जब स्कूल में जाकर देखा तो वह उदय सिंह रावत ही थे।
उदय सिंह ने कहा, "आज मैं अपने परिवार से मिलकर बहुत खुश हूं और सरकार का भी आभार जताता हूं कि इस प्रक्रिया ने मुझे मेरे परिवार से मिला दिया।" उनके छोटे भाई ने कहा कि बड़े भाई के वापस आने से उन्हें ऐसा महसूस हो रहा है, जैसे उनके पिता वापस आ गए हों।
SIR ने 45 साल बाद बेटे को मिलाया की यह घटना दर्शाती है कि सरकारी प्रक्रियाएं कैसे दस्तावेजों के सत्यापन के माध्यम से बिछड़े हुए रिश्तों को दोबारा जोड़ सकती हैं।