Varanasi News: बरेका में गूँजी कविताओं की मधुर तान, कवयित्री झरना मुखर्जी के काव्य संग्रह 'वासंती मन का उत्सव' का भव्य विमोचन
वाराणसी के बरेका में नादान परिंदे साहित्य मंच द्वारा झरना मुखर्जी के काव्य संग्रह 'वासंती मन का उत्सव' का विमोचन हुआ। जानें पुस्तक की मुख्य विशेषताएं।
वाराणसी। साहित्य और कला की नगरी काशी में एक और साहित्यिक रत्न का आगमन हुआ है। बनारस रेल इंजन कारखाना (बरेका) स्थित सभागार में नादान परिंदे साहित्य मंच एवं काशी काव्य संगम के संयुक्त तत्वावधान में प्रख्यात कवयित्री झरना मुखर्जी के नवीन काव्य संग्रह ‘वासंती मन का उत्सव’ का भव्य विमोचन संपन्न हुआ।
दीप प्रज्ज्वलन और सारस्वत अनुष्ठान
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि केशव जालान 'भाई जी' तथा विशिष्ट अतिथियों एवं अध्यक्ष हीरालाल मिश्र 'मधुकर', राम सुधार सिंह, वेद प्रकाश पांडे, मुक्ता जी, महेंद्र अलंकार और कंचन सिंह परिहार द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। सर्वप्रथम गणेश वंदना और सरस्वती वंदना की प्रस्तुति ने वातावरण को भक्तिमय और साहित्यिक गरिमा से भर दिया। स्वागत भाषण नादान परिंदे साहित्य मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. सुबाष चन्द्र ने दिया।
विविध रंगों और संवेदनाओं का संग्रह: झरना मुखर्जी
अपनी कृति के बारे में चर्चा करते हुए कवयित्री झरना मुखर्जी ने बताया कि ‘वासंती मन का उत्सव’ केवल शब्दों का मेल नहीं, बल्कि भावनाओं का विस्तार है। उन्होंने कहा:
"इस संग्रह में प्रेम के सुख-दुःख की अनुभूति के साथ राष्ट्रप्रेम, पर्यावरण संरक्षण और आज के दौर की सामाजिक विसंगतियों को पिरोया गया है। जीवन की चुनौतियों से आहत मन जब शांति तलाशता है, तो वह 'वासंती मन' की छाँव में उत्सव मनाना चाहता है।"
साहित्यकारों का जुटा समागम
विमोचन के अवसर पर काशी के जाने-माने साहित्यकारों और काव्य प्रेमियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम में आलोक सिंह 'बेताब', सुरैया आजाद, नसीम निशा, निकिता सिंह, मधुलिका राय, पूनम श्रीवास्तव, वत्सला श्रीवास्तव, सुषमा मिश्रा और माधुरी मिश्रा सहित कई रचनाकारों ने शिरकत की।
पुरुष रचनाकारों में गिरीश पांडे 'काषिकेय', सिद्धनाथ शर्मा 'सिद्ध', अख़लाक खान 'भारती', जयप्रकाश मिश्रा 'धानापुरी', शमीम गाजीपुरी और अल्ताफ़ हुसैन ने अपनी उपस्थिति से कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।
कुशल संचालन और आभार
साहित्यिक चर्चा और काव्य पाठ से सजे इस सत्र का कुशल संचालन शरद श्रीवास्तव 'शरद' ने किया। कार्यक्रम के अंत में अखलाख भारती ने सभी अतिथियों और साहित्यकारों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया। उपस्थित विद्वानों ने झरना मुखर्जी की लेखनी की सराहना करते हुए इसे हिंदी साहित्य की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।