Varanasi News: हरिश्चंद्र पीजी कॉलेज में 75 साल बाद रचा गया इतिहास; छात्र नेता शिवम पटेल के संघर्षों से संभव हुआ प्रथम दीक्षांत समारोह
वाराणसी के हरिश्चंद्र पीजी कॉलेज में 1951 के बाद पहली बार दीक्षांत समारोह आयोजित हुआ। छात्र प्रतिनिधि शिवम पटेल के संघर्ष से मूट कोर्ट और कंप्यूटर लैब भी तैयार।
वाराणसी। काशी के प्रतिष्ठित हरिश्चंद्र स्नातकोत्तर महाविद्यालय के इतिहास में 15 जनवरी 2026 का दिन स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो गया। वर्ष 1951 में अपनी स्थापना के बाद से आज तक के करीब 75 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद महाविद्यालय प्रांगण में प्रथम दीक्षांत समारोह सकुशल संपन्न हुआ। यह ऐतिहासिक उपलब्धि छात्र प्रतिनिधि शिवम पटेल और उनके साथियों के लंबे संघर्षों और अथक प्रयासों का परिणाम है।
आठ माह का लंबा संघर्ष और धरना प्रदर्शन
छात्र प्रतिनिधि शिवम पटेल ने बताया कि दीक्षांत समारोह के आयोजन, विधि विभाग के लिए मूट कोर्ट और कंप्यूटर लैब की स्थापना के लिए वे अप्रैल 2025 से ही संघर्षरत थे। इस दौरान महाविद्यालय प्राचार्य, विश्वविद्यालय प्रशासन और जिला प्रशासन के साथ कई दौर की वार्ता हुई। जब आठ माह बीतने के बाद भी परिणाम नहीं निकला, तो शिवम पटेल अपने साथियों के साथ 18 दिसंबर 2025 को अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए। अंततः प्रशासन को झुकना पड़ा और उनकी मेहनत रंग लाई।
विश्वविद्यालय के चक्करों से मिली मुक्ति
इस दीक्षांत समारोह की सबसे बड़ी राहत यह रही कि अब छात्रों को अपनी डिग्री (उपाधि) के लिए महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
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नि:शुल्क उपाधि: वर्ष 2023 में उत्तीर्ण समस्त छात्र अपनी उपाधि महाविद्यालय से ही नि:शुल्क प्राप्त कर सकते हैं।
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भविष्य की प्रेरणा: वर्तमान में अध्ययनरत छात्र इस आयोजन से अत्यंत उत्साहित हैं, क्योंकि उन्हें अब भविष्य में इसी प्रकार सम्मानित होने की प्रेरणा मिलेगी।
कुलपति ने थपथपाई शिवम पटेल की पीठ
समारोह के मुख्य अतिथि महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के माननीय कुलपति ने शिवम पटेल को उपाधि प्रदान कर सम्मानित किया। कुलपति महोदय ने मंच से शिवम पटेल के जुझारू व्यक्तित्व और महाविद्यालय के विकास के लिए उनके द्वारा किए गए संघर्षों की मुक्त कंठ से सराहना की।
शिवम पटेल ने इस ऐतिहासिक क्षण पर हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें उम्मीद है कि अब भविष्य में हर वर्ष इसी तरह दीक्षांत समारोह का आयोजन होता रहेगा, ताकि छात्रों का गौरव बढ़ सके।