विश्व गुरु बनने के लिए शिक्षा में संस्कृति-संस्कार जरूरी: आधुनिकता में नैतिक पतन पर चिंतन; BSB की अहम बैठक में 'संस्कार युक्त' एजुकेशन मॉडल पर जोर
Vishwa Guru Banne Ke Liye Shiksha Mein Sanskriti Sanskar Zaroori: भारतीय शिक्षा बोर्ड (BSB) की अलीगढ़ बैठक में फैसला। आधुनिक शिक्षा में भारतीय संस्कृति और संस्कारों को जोड़कर बच्चों को चरित्रवान बनाने पर जोर।
अलीगढ़, उत्तर प्रदेश: भारतीय शिक्षा बोर्ड (BSB) की अलीगढ़ मंडल स्तरीय संगोष्ठी कल्याण सिंह हैबिटेट सेंटर में संपन्न हुई, जिसमें देश को फिर से विश्व गुरु बनाने के लिए शिक्षा के मॉडल पर गहन चर्चा की गई। इस संगोष्ठी का मूल भाव यह रहा कि विश्व गुरु बनने के लिए शिक्षा में संस्कृति-संस्कार जरूरी हैं, और आधुनिक शिक्षा के परिवेश में भारतीय मूल्यों का समावेश करना समय की मांग है।
बैठक में भारतीय शिक्षा बोर्ड (BSB) की आवश्यकता पर विस्तार से चर्चा की गई, जिसमें मंडल के 300 से अधिक विद्यालयों के प्रबंधकों, प्राचार्यों और प्रतिनिधियों ने सहभागिता की।
आधुनिक शिक्षा में नैतिक पतन पर चिंतन
संगोष्ठी के मुख्य वक्ता, भारतीय शिक्षा बोर्ड के चेयरमैन और सेवानिवृत आईएएस डॉ. एन पी सिंह थे। उन्होंने विस्तार से बताया कि पाश्चात्य शिक्षा के परिवेश में भारतीय संस्कृति और संस्कारों का अभाव है, जिसके कारण छात्र-छात्राओं का नैतिक पतन हो रहा है।
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BSB का मूल उद्देश्य: डॉ. एन पी सिंह ने बताया कि भारतीय शिक्षा बोर्ड का मूल उद्देश्य बच्चों को भारतीय संस्कृति, वेद, शास्त्र, उपनिषद, गीता जैसी आध्यात्मिक शिक्षाओं के साथ-साथ आधुनिक कंप्यूटर साइंस और प्रकृति के मूल से जोड़कर गुणवत्तापूर्ण, संस्कारयुक्त और चरित्रवान बनाना है।
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आह्वान: उन्होंने भौतिकतावादी चकाचौंध से विचार परिवर्तन करने का निवेदन करते हुए सभी विद्यालयों से अपील की कि यदि भारत को सशक्त, संस्कारवान और विश्व गुरु बनाना है, तो वे अपने विद्यालयों को भारतीय शिक्षा बोर्ड से संबद्ध करें।
इमारतों से ज्यादा संस्कारों पर ध्यान
मुख्य अतिथि मंडलायुक्त संगीता सिंह ने अपने संबोधन में शिक्षकों और माता-पिता की जिम्मेदारी पर जोर दिया।
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माता-पिता और शिक्षक: उन्होंने कहा कि बच्चों को संस्कार देने का काम सर्वाधिक माता-पिता और आदर्श शिक्षक का होता है, क्योंकि माहौल भी उन्हें प्रभावित करता है।
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प्राचीन संस्कृति की ओर लौटना: उन्होंने अभिभावकों से कहा कि हमें बड़ी-बड़ी फैसिलिटी युक्त इमारतों वाले विद्यालयों की ओर अधिक आकर्षित नहीं होना है, बल्कि प्राचीन वैदिक संस्कृति की ओर लौटना है। अतः उन्होंने भारतीय शिक्षा बोर्ड संस्थान से विद्यालय जोड़कर बच्चों को प्रवेश दिलाने का समर्थन किया।
पतंजलि परिवार और विद्यालयों की सहभागिता
संगोष्ठी का संचालन सुनील शास्त्री (राज्य प्रभारी भारत स्वाभिमान) ने किया। पतंजलि परिवार से दयाशंकर आर्य, रविकर, जेसी चतुर्वेदी, यशोधन जी, शिवनन्दन समेत जिले के कई पदाधिकारी और कार्यकर्ताओं ने सहभागिता की। मंडल के 300 से अधिक विद्यालयों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति ने इस मुद्दे के प्रति व्यापक समर्थन को दर्शाया।
यह बैठक उस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जहाँ शिक्षा का उद्देश्य केवल नौकरी प्राप्त करना नहीं, बल्कि चरित्रवान और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध नागरिक तैयार करना है, जो देश को विश्व गुरु का दर्जा दिला सकें।