आगरा की 13 साल की बेटी 10 माह बाद घर लौटी: महाकुंभ में साध्वी बनने की जिद, परिवार को मांगनी पड़ी थी पुलिस मदद

आगरा की 13 वर्षीय लड़की जो महाकुंभ में साध्वी बन गई थी, 10 माह बाद काउंसलिंग के बाद परिवार लौटी। परिजनों को बेटी की वापसी के लिए पुलिस की मदद लेनी पड़ी।

Nov 17, 2025 - 11:27
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आगरा की 13 साल की बेटी 10 माह बाद घर लौटी: महाकुंभ में साध्वी बनने की जिद, परिवार को मांगनी पड़ी थी पुलिस मदद

आगरा: उत्तर प्रदेश के आगरा की एक 13 वर्षीय लड़की, जिसने महाकुंभ 2024 में अचानक संन्यास लेकर साध्वी बनने का फैसला किया था, आखिरकार लगभग 10 माह बाद अपने परिवार के पास लौट आई है। उसकी वापसी से घर में खुशियों का माहौल है और उसके माता-पिता ने राहत की सांस ली है। यह घटना इस बात को लेकर चर्चा का केंद्र बन गई थी कि इतनी छोटी उम्र में कैसे किसी बच्चे का अध्यात्म की ओर इतना गहरा झुकाव हो सकता है।


महाकुंभ में लिया था संन्यास का संकल्प

आगरा के डौकी क्षेत्र की रहने वाली यह लड़की 5 दिसंबर को अपने माता-पिता के साथ महाकुंभ 2024 गई थी। वहीं उसके मन में साध्वी बनने का विचार आया। उसने अचानक संन्यास लेने का ऐलान कर दिया और परिवार के लाख समझाने के बावजूद घर लौटने से इनकार कर दिया।

लड़की का झुकाव अध्यात्म की ओर इतना गहरा था कि परिवार को हार माननी पड़ी। परिजनों ने उसे जूना अखाड़े के महंत कौशल गिरि को दान कर दिया। गुरु की मौजूदगी में उसे गंगा स्नान कराया गया और विधि-विधान के साथ संन्यास दिलाया गया। महंत ने उसका नया नाम साध्वी गौरी रखा। संन्यास लेने के बाद उसने हरियाणा स्थित कौशल किशोर आश्रम पहुंचकर साध्वी जीवन का अभ्यास शुरू कर दिया।


पिंडदान की तैयारी के बीच मांगी पुलिस की मदद

नन्ही सी उम्र में घर, परिवार और पढ़ाई छोड़ देने के उसके फैसले ने माता-पिता को भीतर तक तोड़ दिया था। लड़की के संन्यास के बाद, उसका पहला अमृत स्नान संपन्न हुआ था और आगे उसके पिंडदान करने की भी तैयारी चल रही थी, जिसके लिए 19 जनवरी 2025 की तारीख तय की गई थी।

बेटी को खो देने के दर्द में डूबे परिजनों ने आखिरकार पुलिस से मदद मांगी और बेटी को वापस लाने की गुहार लगाई। पुलिस तुरंत एक्टिव हुई और आश्रम से बच्ची को सुरक्षित आगरा वापस लाया गया।


काउंसलिंग ने बदला मन, घर में आई खुशियां

घर लाए जाने के बाद, पुलिस और विशेषज्ञों की एक टीम ने लड़की से कई घंटों तक बातचीत की और उसे संन्यास जीवन और सामान्य जीवन के विकल्पों के बारे में समझाया। काउंसलिंग के दौरान लड़की के मन में धीरे-धीरे बदलाव आया और उसने परिवार के पास लौटने का निर्णय ले लिया।

घर पहुंचते ही उसकी मां-पिता की आंखों से खुशी के आंसू बह निकले। लड़की ने भी स्वीकार किया कि वह अब अपने माता-पिता के साथ रहना चाहती है और पढ़-लिखकर जीवन में कुछ अच्छा करना चाहती है।

महामंडलेश्वर कौशल गिरि ने भले ही विशेष अनुष्ठान की तैयारी शुरू कर दी थी, लेकिन पुलिस और विशेषज्ञों की यह मानवीय पहल रंग लाई और लड़की ने संन्यास जीवन छोड़कर परिवार के साथ रहने का रास्ता चुना, जिससे एक परिवार का 10 महीने पुराना दर्द खत्म हुआ और घर में खुशियों की वापसी हुई।