दिल्ली धमाका जांच: हापुड़ के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. फारुख 7 दिन की पूछताछ के बाद रिहा; अल फलाह यूनिवर्सिटी जांच के घेरे में
दिल्ली धमाके की जांच: हापुड़ के जीएस मेडिकल कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. फारुख को 7 दिन की पूछताछ के बाद दिल्ली पुलिस ने रिहा किया। अल फलाह यूनिवर्सिटी जांच के घेरे में।
नई दिल्ली/हापुड़: दिल्ली में पिछले सप्ताह लाल किले के पास हुए बम धमाके को लेकर चल रही जांच में मंगलवार को एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। दिल्ली पुलिस ने जांच के लिए हापुड़ से हिरासत में लिए गए असिस्टेंट प्रोफेसर डॉक्टर फारुख को करीब सात दिन की पूछताछ के बाद छोड़ दिया है।
जीएस मेडिकल कॉलेज से हुए थे हिरासत में
डॉक्टर फारुख हापुड़ के पिलखुवा स्थित जीएस मेडिकल कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत थे और लगभग एक साल से कैंपस में ही रह रहे थे। 12 नवंबर की रात उन्हें लाल किले के पास हुए धमाके के बाद पुलिस ने कैंपस से ही हिरासत में लिया था।
पुलिस के अनुसार, डॉ. फारुख जम्मू-कश्मीर के मूल निवासी हैं और उन्होंने हरियाणा के फरीदाबाद स्थित अल फलाह यूनिवर्सिटी से मेडिकल की पढ़ाई की थी। जांच एजेंसियों को यह जानकारी मिली थी कि वह संदिग्ध डॉक्टर शाहीन के भाई डॉक्टर परवेज़ के साथ नियमित रूप से संपर्क में थे।
अल फलाह यूनिवर्सिटी और डॉक्टर्स संदेह के घेरे में
इस धमाके की जांच के बाद कई संदिग्ध डॉक्टर्स और शिक्षण संस्थान जांच के दायरे में आ गए हैं।
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आतंकी मॉड्यूल का खुलासा: प्रतिबंधित जैश-ए-मोहम्मद और अंसार गजवत-उल-हिंद से जुड़े एक 'सफेदपोश' आतंकी मॉड्यूल का खुलासा होने के बाद अल फलाह यूनिवर्सिटी भी जांच एजेंसियों की जांच के दायरे में आ गई।
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अन्य हिरासत: डॉ. फारुख के साथ ही, यूपी एटीएस ने कानपुर से हृदय रोग की पढ़ाई कर रहे 32 साल के मोहम्मद आरिफ मीर को भी हिरासत में लिया था, जो राजकीय जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में डीएम (कार्डियोलॉजी) के छात्र हैं।
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ईडी की रेड: इस बीच, जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने धमाके मामले में मुख्य भूमिका निभाने वाले अल फलाह यूनिवर्सिटी के ट्रस्टियों और प्रवर्तकों के खिलाफ दिल्ली-एनसीआर में मंगलवार को एक साथ 25 परिसरों पर छापेमारी (रेड) की।
राजधानी दिल्ली में 10 नवंबर को हुए धमाके में 15 लोग मारे गए थे, और यूनिवर्सिटी तथा कश्मीर से जुड़े कई डॉक्टरों की भूमिका आतंकवाद निरोधी जांच एजेंसियों की जांच के दायरे में है। हालांकि, लंबे समय तक पूछताछ के बाद डॉ. फारुख को रिहा कर दिया गया है।