लखीमपुर पेड़ और कुएं की शादी: बैंड-DJ, बारात और भोज… इमली के पेड़ को दुल्हन और कुएं को दूल्हा बनाकर ग्रामीणों ने की अनोखी शादी
Lakhimpur Ped Aur Kuen Ki Shaadi: लखीमपुर खीरी के भैरमपुर गांव में अनोखी शादी। इमली के पेड़ को दुल्हन और कुएं को दूल्हा बनाकर ग्रामीणों ने बारात निकाली। 60 साल पुरानी परंपरा का जश्न।
लखीमपुर खीरी, उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश का लखीमपुर खीरी जिला इन दिनों एक ऐसी अनोखी शादी को लेकर चर्चा में है, जिसने सभी का ध्यान खींचा है। यहाँ के भैरमपुर गांव में, ग्रामीणों ने अपनी पुरानी परंपरा को निभाते हुए, इमली के पेड़ को दुल्हन और कुएं को दूल्हा बनाकर उनका विधि-विधान से विवाह करवाया। गांव वालों ने इस शादी का जमकर जश्न मनाया, जिसमें धूमधाम से बारात निकाली गई, डीजे साउंड पर डांस हुआ और भोज का भी इंतजाम किया गया।
धूमधाम से निकाली गई 'कुएं' की बारात
इस अनोखी शादी की सभी रस्में पारंपरिक तरीके से पूरी की गईं।
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दूल्हा बना कुआँ: पंडित कृपा शंकर ने आम की लकड़ी से वर स्वरूप कुएं का पुतला बनाया। इस पुतले को माला और पगड़ी से सजाया गया।
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दुलहन बनी इमली: दुल्हन बने इमली के पौधे को सुहाग की सभी चीज़ें पहनाई गईं।
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बारात और रस्में: कुएं पक्ष के बारातियों ने गांव में धूमधाम से बारात निकाली। इसके बाद, पुतले से धागा बांधकर, धागे के छोर को 400 मीटर दूर आम के बाग में वधू इमली के पौधे के साथ बंधन कराया।
60 साल पुरानी परंपरा
ग्रामीणों ने बताया कि यह अनोखी परंपरा गांव में काफी पुरानी है, जिसे सामाजिक रूप से शुभ माना जाता है:
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पुनरावृत्ति: जगन्नाथ प्रसाद यादव ने बताया कि साल 1960 में गांव के खुशीराम यादव के कुएं का विवाह इमली के संग हुआ था। 1995 में भी यह विवाह दोहराया गया था।
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पुनर्विवाह का कारण: खुशीराम यादव के बेटों के बंटवारे में कुआं एक बेटे के हिस्से में आ गया था, जिससे महिलाओं को विवाह की रस्में पूरी करने में दिक्कतें आ रही थीं। वहीं, बाग में इमली का पेड़ दीमक के कारण विलुप्त हो गया था।
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निर्णय: इसके बाद साल 2024 में नया इमली का पौधा लगाकर, गांव के चौराहे के कुएं से उसकी शादी करने का फैसला लिया गया।
लखीमपुर पेड़ और कुएं की शादी (Lakhimpur Ped Aur Kuen Ki Shaadi) को देखने के लिए भारी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे और सभी ने इस अनोखी परंपरा का जश्न मनाया।