Lucknow False Rape Case Conviction: एक्स बॉयफ्रेंड की शादी कहीं और तय हुई, बदला लेने के लिए लगाया SC-ST एक्ट व रेप का झूठा केस; लखनऊ कोर्ट ने युवती को सुनाई साढ़े तीन साल की सज़ा

लखनऊ की SC-ST कोर्ट ने पूर्व प्रेमी पर रेप और SC-ST एक्ट का झूठा केस दर्ज कराने वाली युवती को साढ़े तीन साल की सज़ा सुनाई। कोर्ट ने कहा- सहमति से बने संबंध दुष्कर्म नहीं कहलाते, यह कानून का दुरुपयोग है।

Nov 19, 2025 - 14:21
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Lucknow False Rape Case Conviction: एक्स बॉयफ्रेंड की शादी कहीं और तय हुई, बदला लेने के लिए लगाया SC-ST एक्ट व रेप का झूठा केस; लखनऊ कोर्ट ने युवती को सुनाई साढ़े तीन साल की सज़ा

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से कानून के दुरुपयोग पर कड़ा संदेश देने वाला एक महत्वपूर्ण फैसला सामने आया है। SC-ST एक्ट विशेष अदालत ने अपने पूर्व प्रेमी पर झूठा दुष्कर्म और SC-ST एक्ट का मामला दर्ज कराने वाली युवती को दोषी ठहराते हुए साढ़े तीन साल की कठोर कारावास की सज़ा सुनाई है, साथ ही ₹30,000 का जुर्माना भी लगाया है।

अदालत ने अपने फैसले में साफ कहा कि कानून का बदले की भावना से दुरुपयोग करना एक गंभीर अपराध है।


बदले की भावना से दर्ज कराई FIR

यह मामला एक युवक और युवती के बीच कई वर्षों तक चले प्रेम संबंध से जुड़ा है, जिसके दौरान दोनों के बीच सहमति से शारीरिक संबंध भी बने थे।

  • विवाद का कारण: जब युवक के परिवार वालों ने उसकी शादी कहीं और तय कर दी, तो युवती ने आवेश में आकर उस पर दुष्कर्म और SC-ST एक्ट की गंभीर धाराओं में झूठा मामला दर्ज करा दिया।

  • जांच का नतीजा: पुलिस जांच के दौरान, युवती की ओर से लगाए गए सभी आरोप पूरी तरह से निराधार और फर्जी पाए गए। जांच में यह स्पष्ट हो गया कि दोनों के बीच संबंध पूरी तरह से सहमति पर आधारित थे, और कोई जबरदस्ती नहीं की गई थी। इसके बाद, कोर्ट ने युवती के खिलाफ ही झूठी FIR दर्ज कराने के आरोप में मुकदमा चलाने का निर्देश दिया।


कोर्ट की कड़ी टिप्पणी: सहमति से बने संबंध दुष्कर्म नहीं

विशेष न्यायाधीश विवेकानंद शरण त्रिपाठी ने अपने फैसले में कानून के दुरुपयोग पर गहरी चिंता व्यक्त की।

  • कानून का दुरुपयोग: कोर्ट ने कहा कि हाल के वर्षों में विवाहेत्तर/अनैतिक संबंधों को लेकर शिकायतों में बढ़ोतरी देखी जा रही है, जहाँ संबंध टूटने पर दुष्कर्म का मामला दर्ज करा दिया जाता है। यह कानून का गंभीर दुरुपयोग है।

  • अहम फैसला: न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि सहमति से बने लंबे संबंध बाद में दुष्कर्म नहीं कहलाते।

राहत राशि वापस लेने का निर्देश

न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण निर्देश जारी करते हुए कहा कि चार्जशीट दाखिल होने से पहले राहत राशि देना गलत है, क्योंकि इससे झूठे मुकदमों को बढ़ावा मिलता है।

  • आदेश: कोर्ट ने पुलिस कमिश्नर और जिलाधिकारी को तत्काल निर्देश दिया है कि यदि युवती को इस झूठे मुकदमे के तहत किसी भी प्रकार का सरकारी मुआवजा या राहत राशि मिली है, तो उसे तत्काल प्रभाव से वापस वसूल किया जाए।