महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने पर जोर, मिशन शक्ति फेज-5 के तहत वित्तीय साक्षरता कार्यक्रम आयोजित
महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में मिशन शक्ति फेज-5 के तहत आयोजित वित्तीय साक्षरता कार्यक्रम में महिलाओं को डिजिटल बैंकिंग, बचत, निवेश और आर्थिक आत्मनिर्भरता के प्रति जागरूक किया गया।
वाराणसी। महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के वाणिज्य एवं प्रबंध अध्ययन संकाय में मिशन शक्ति फेज-5 के अंतर्गत “महिलाओं में वित्तीय साक्षरता हेतु जागरूकता” कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में महिलाओं को वित्तीय प्रबंधन, डिजिटल बैंकिंग, निवेश और बचत के महत्व के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता संकायाध्यक्ष प्रो. सुधीर कुमार शुक्ल ने कहा कि वित्तीय साक्षरता महिलाओं को धन प्रबंधन, कर प्रबंधन, बजट निर्माण, बचत, निवेश और डिजिटल बैंकिंग की समझ प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि आर्थिक रूप से जागरूक महिलाएं आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी बनती हैं तथा भविष्य की आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करने में सक्षम होती हैं।
विशिष्ट वक्ता विभागाध्यक्ष प्रो. अजीत कुमार शुक्ल ने डिजिटल साक्षरता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आज के दौर में मोबाइल बैंकिंग, यूपीआई, ऑनलाइन लेनदेन, शेयर मार्केट और म्युचुअल फंड जैसी वित्तीय सेवाओं का सुरक्षित उपयोग करना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि वित्तीय जानकारी महिलाओं को उद्यमशीलता की दिशा में आगे बढ़ने और स्वयं का व्यवसाय शुरू करने में भी सहायक सिद्ध होती है।
महिला सशक्तिकरण प्रकोष्ठ की संयोजक प्रोफेसर निशा सिंह ने कार्यक्रम की उपयोगिता पर चर्चा करते हुए कहा कि महिलाओं में वित्तीय जागरूकता बढ़ाने के लिए समय-समय पर कार्यशालाएं और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि सामुदायिक स्तर पर महिलाओं को बचत, बीमा और निवेश के प्रति जागरूक बनाना आवश्यक है। साथ ही भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और अन्य संस्थाओं द्वारा संचालित “डिजिटल सखी” जैसी पहलों के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को डिजिटल वित्तीय सेवाओं के उपयोग का प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. धनंजय विश्वकर्मा ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. आयुष कुमार द्वारा प्रस्तुत किया गया। इस अवसर पर डॉ. रीना शुक्ला, डॉ. दिलीप कुमार सिंह, डॉ. चित्रसेन गौतम सहित अन्य शिक्षक, महिला शोधार्थी एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहीं।