शिमला संजौली मस्जिद विवाद: 'मस्जिद में नहीं होने देंगे जुमे की नमाज…' हिंदू संगठन ने चेताया, शस्त्र पूजा कर बढ़ाया विरोध; प्रशासन की बढ़ी चुनौती
Shimla Sanjauli Masjid Vivaad: संजौली मस्जिद को लेकर विवाद बढ़ा। देवभूमि संघर्ष समिति ने शुक्रवार को जुमे की नमाज रोकने का ऐलान किया। अवैध निर्माण पर कोर्ट के आदेश के बावजूद विरोध जारी।
शिमला, हिमाचल प्रदेश: हिमाचल प्रदेश के शिमला स्थित संजौली मस्जिद को लेकर चल रहा विवाद एक बार फिर उग्र हो गया है। देवभूमि संघर्ष समिति ने ऐलान किया है कि वह शुक्रवार (29 नवंबर 2025) को मस्जिद परिसर में किसी भी व्यक्ति को जुमे की नमाज अदा नहीं करने देगी। समिति ने मुस्लिम समुदाय से अपील की है कि वे क्षेत्र में शांति और सांप्रदायिक सद्भाव कायम रखने के लिए इस स्थान पर न पहुँचें।
धरने के दौरान की गई शस्त्र पूजा
देवभूमि संघर्ष समिति के सदस्य पिछले दस दिनों से संजौली में धरना दे रहे हैं। गुरुवार को अपने आंदोलन के दौरान समिति के सदस्यों ने शस्त्र पूजा भी की।
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समिति का आरोप: समिति के सह-संयोजक विजय शर्मा ने आरोप लगाया कि न्यायालय द्वारा ढांचे को अवैध घोषित किए जाने और उसे हटाने के आदेश जारी होने के बावजूद मस्जिद में नमाज पढ़ी जा रही है।
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बैठक पर निगाहें: समिति 29 नवंबर को प्रशासन के साथ होने वाली बैठक का इंतजार कर रही है, जिसके नतीजों के आधार पर ही आंदोलन की आगे की रणनीति तय की जाएगी।
अदालत ने भी माना था अवैध निर्माण
संजौली मस्जिद से जुड़ा विवाद पुराना है। बीते वर्ष शिमला नगर निगम आयुक्त ने इस ढांचे के कुछ हिस्सों को अवैध बताते हुए हटाने के आदेश जारी किए थे।
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कानूनी प्रक्रिया: मस्जिद कमेटी और वक्फ बोर्ड ने इन आदेशों को जिला अदालत में चुनौती दी थी, लेकिन अदालत ने भी नगर निगम आयुक्त के फैसले को सही ठहराया था।
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अंतिम आदेश: लगभग 50 से अधिक सुनवाई के बाद, 3 मई 2025 को आयुक्त ने विस्तृत आदेश जारी करते हुए पूरी मस्जिद संरचना को अवैध घोषित किया और इसे हटाने के निर्देश दिए।
क्यों उत्पन्न हुआ विवाद?
संजौली मस्जिद से जुड़ा विवाद 31 अगस्त 2024 को उस समय सुर्खियों में आया, जब मेहली क्षेत्र में दो समुदायों के बीच झड़प हो गई और एक पक्ष के कुछ लोग कथित तौर पर मस्जिद में शरण लेने लगे।
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तनाव: हालात इतने बिगड़े कि 11 सितंबर 2024 को पुलिस को लाठीचार्ज और वाटर कैनन का सहारा लेना पड़ा।
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सहमति: 12 सितंबर को मस्जिद कमेटी ने नगर निगम आयुक्त की अदालत में स्वयं पेश होकर मस्जिद के अवैध हिस्से को हटाने की सहमति जताई थी, जिससे स्थिति कुछ शांत हुई थी।
अब समिति द्वारा शुक्रवार की नमाज रोकने की घोषणा के बाद इलाके में सांप्रदायिक तनाव बढ़ गया है और प्रशासन की चुनौतियाँ और बढ़ गई हैं।