सोनभद्र: 72 घंटे बाद खत्म हुई जिंदगी की तलाश, अंधेरे खदान में रेस्क्यू टीम को आईं ये 5 बड़ी चुनौतियां; 7 की मौत की पुष्टि
सोनभद्र खनन हादसा: 72 घंटे बाद रेस्क्यू ऑपरेशन समाप्त, 7 मजदूरों की मौत की पुष्टि। अंधेरी खदान में लगातार खिसकती चट्टानें और खराब मौसम थीं बड़ी चुनौतियां।
सोनभद्र: उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले में ओबरा बिल्ली-मारकुंडी खनन क्षेत्र में रविवार को हुए भीषण हादसे के बाद लगभग 72 घंटे तक चला राहत और बचाव अभियान आखिरकार आज आधिकारिक रूप से समाप्त कर दिया गया। तीन दिनों तक नॉन-स्टॉप चले इस अभियान में मलबे से कुल सात मजदूरों के शव बरामद किए गए हैं, जिनकी पहचान प्रशासन ने पूरी तरह से कर ली है।
किसी और के दबे होने की संभावना नहीं
जिलाधिकारी बीएन सिंह ने रेस्क्यू ऑपरेशन समाप्त करने के निर्णय की पुष्टि करते हुए बताया कि तकनीकी विशेषज्ञों के साथ विस्तृत निरीक्षण और ग्राउंड असेसमेंट के बाद यह पूरी तरह स्पष्ट हो गया है कि अब मलबे के भीतर किसी और मजदूर के दबे होने की संभावना नहीं है।
बीते तीन दिनों में खुदाई, ड्रोन सर्विलांस, मलबे की परतों की स्कैनिंग और मैनुअल सर्चिंग के बावजूद कोई अतिरिक्त शव या मानवीय गतिविधि का संकेत नहीं मिला। इन्हीं निष्कर्षों के आधार पर रेस्क्यू ऑपरेशन को बंद करने का निर्णय लिया गया है।
72 घंटे के रेस्क्यू की 5 बड़ी चुनौतियां
72 घंटे चले इस राहत अभियान में एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, सीआईएसएफ और खनन विशेषज्ञों की संयुक्त टीमें शामिल थीं। खदान की प्रकृति और परिस्थितियों के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन अत्यंत चुनौतीपूर्ण रहा:
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अत्यधिक गहराई: खदान की 300 फीट से अधिक गहराई ने मलबा हटाने और उपकरणों को नीचे ले जाने को मुश्किल बना दिया।
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चट्टानों का खिसकना: मलबा हटाते समय टूटी और ढीली चट्टानों के लगातार खिसकने का खतरा बना रहा, जिससे टीम को बेहद सावधानी से काम करना पड़ा।
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मिट्टी की नमी और स्थिरता: लगातार खिसक रही मिट्टी ने बचाव कार्य के लिए सुरक्षित प्लेटफार्म बनाने में बाधाएं उत्पन्न कीं।
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कम दृश्यता: देर रात और सुबह के समय घना कोहरा, नमी और दृश्यता में कमी ने खोज और निगरानी कार्य में बाधा डाली।
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संकीर्ण रास्ते: खदान के अंदर संकरे रास्ते और सीमित जगह होने के कारण भारी मशीनरी का उपयोग सीमित रहा।
जांच तेज, डीएम के हलफ़नामे पर सवाल
सातों मृत मजदूरों के शवों की पहचान होने के बाद प्रशासन ने उन्हें परिजनों को सौंपने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
पुलिस अधीक्षक अभिषेक वर्मा ने बताया कि हादसे की जांच तेज़ी से आगे बढ़ रही है। पुलिस ने खदान संचालन से जुड़े दस्तावेज, सुरक्षा अनुमतियां और विस्फोटक उपयोग से संबंधित रिकॉर्ड का विस्तृत तकनीकी अध्ययन शुरू कर दिया है। एसपी ने स्पष्ट किया कि जैसे ही जांच में किसी की लापरवाही सिद्ध होती है, उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
ज्ञात हो कि इस हादसे ने प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं, विशेष रूप से जिलाधिकारी द्वारा पहले दिए गए उस हलफ़नामे पर जिसमें खदान में खनन को मानकों के अनुरूप बताया गया था।