मैनपुरी: डॉक्टरों की लापरवाही का दर्दनाक नतीजा, गलत नसें जोड़ने से बिगड़ी मरीज की हालत; हाथ काटकर बचाई गई जान

मैनपुरी: प्राइवेट अस्पताल में डॉक्टरों ने मरीज के हाथ की नसें गलत जोड़ दीं, जिससे संक्रमण फैला। जान बचाने के लिए युवक का हाथ काटना पड़ा। परिजनों ने DM से शिकायत की।

Nov 17, 2025 - 11:38
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मैनपुरी: डॉक्टरों की लापरवाही का दर्दनाक नतीजा, गलत नसें जोड़ने से बिगड़ी मरीज की हालत; हाथ काटकर बचाई गई जान

मैनपुरी: उत्तर प्रदेश के मैनपुरी में डॉक्टरों की घोर लापरवाही के कारण एक युवक को अपना हाथ गंवाना पड़ा है। सड़क दुर्घटना के बाद एक प्राइवेट अस्पताल में गलत इलाज होने की वजह से मरीज की जान बचाने के लिए डॉक्टर्स को उसका एक हाथ काटना पड़ा। यह घटना स्वास्थ्य सेवाओं पर एक गंभीर सवाल खड़ा करती है।


निजी अस्पताल में हुआ था ऑपरेशन

मैनपुरी के सुल्तानगंज ब्लॉक के छाछा गांव के रहने वाले मेघनाथ का पिछले महीने 18 अक्टूबर को एक्सीडेंट हो गया था। उनके भाई अशोक कुमार ने उन्हें एक प्राइवेट हॉस्पिटल में भर्ती कराया।

भाई अशोक कुमार ने जिलाधिकारी अंजनी कुमार सिंह से शिकायत करते हुए बताया कि अस्पताल में दो लोगों ने खुद को डॉक्टर बताकर इलाज शुरू किया और इलाज के नाम पर उनसे 30 हजार रुपये जमा कराए गए। ऑपरेशन के बाद 5 दिन तक इलाज चला और फिर मेघनाथ को डिस्चार्ज कर दिया गया।


गलत नसें जोड़ने से बढ़ा संक्रमण का खतरा

अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद मेघनाथ को घर ले जाया गया, लेकिन घर पहुंचने पर उनकी तकलीफ कम होने के बजाय और बढ़ने लगी

परेशान होकर, परिजन मेघनाथ को दूसरे प्राइवेट हॉस्पिटल ले गए। वहाँ डॉक्टरों ने चेकअप किया और जो बताया, वह चौंकाने वाला था। डॉक्टरों ने बताया कि पहले अस्पताल में पीड़ित के एक हाथ की नसें गलत जोड़ दी गई हैं

डॉक्टर ने सलाह दी कि मरीज की जान बचाने के लिए उसका हाथ काटना पड़ेगा, क्योंकि अगर हाथ नहीं काटा जाता तो संक्रमण (इंफेक्शन) बढ़ सकता है और जान को भी खतरा हो सकता है।


लापरवाही की कीमत: युवक ने गंवाया हाथ

मरीज की जान बचाने के लिए अंततः उसका हाथ काट दिया गया। इस तरह, कथित तौर पर पहले प्राइवेट अस्पताल में हुई डॉक्टरों की लापरवाही की वजह से मेघनाथ को अपना एक हाथ गंवाना पड़ा है।

पीड़ित के भाई अशोक कुमार ने अब इस मामले में जिलाधिकारी से शिकायत कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। यह घटना प्राइवेट स्वास्थ्य सेवाओं में जवाबदेही और गुणवत्ता नियंत्रण की आवश्यकता को उजागर करती है।