Varanasi News: क्वींस कॉलेज में 53वीं राज्य स्तरीय बाल वैज्ञानिक प्रदर्शनी का समापन, नवाचारों ने दिखाया 'आत्मनिर्भर भारत' का सपना
वाराणसी के क्वींस इंटर कॉलेज में 53वीं राज्य स्तरीय बाल वैज्ञानिक प्रदर्शनी संपन्न हुई। प्रदेश के 504 बाल वैज्ञानिकों ने पेश किए 'विकसित भारत' के मॉडल।
वाराणसी। विज्ञान और तकनीक के संगम से सजी 53वीं राज्य स्तरीय बाल वैज्ञानिक प्रदर्शनी–2025 का आज पीएम श्री राजकीय क्वींस इंटर कॉलेज में भव्य समापन हुआ। चार दिनों तक चली इस प्रदर्शनी ने यह साबित कर दिया कि उत्तर प्रदेश के युवा वैज्ञानिकों में भविष्य के 'विकसित भारत' की नींव रखने का अद्भुत सामर्थ्य है।
STEM: आत्मनिर्भर भारत का आधार
राज्य विज्ञान शिक्षा संस्थान, उत्तर प्रदेश (प्रयागराज) द्वारा आयोजित इस प्रदर्शनी का मुख्य विषय “विकसित एवं आत्मनिर्भर भारत के लिए STEM (Science, Technology, Engineering, Mathematics)” रहा। 16 दिसंबर से 19 दिसंबर तक चले इस आयोजन में प्रदेश के विभिन्न जनपदों से आए 504 चयनित छात्र-छात्राओं और उनके मार्गदर्शक शिक्षकों ने हिस्सा लिया।
नवाचारों से सजी रही प्रदर्शनी
प्रदर्शनी में 7 उप-विषयों पर आधारित मॉडल प्रस्तुत किए गए। इसमें कक्षा 6 से 12 तक के छात्रों के साथ-साथ माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों ने भी गणित, विज्ञान और कंप्यूटर पर आधारित शिक्षण-अधिगम सामग्री (TLM) प्रदर्शित की।
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मूल्यांकन वर्ग: प्रतिभागियों को जूनियर (कक्षा 10 तक), सीनियर (कक्षा 11-12) और अध्यापक वर्ग में विभाजित कर उनके मॉडल का मूल्यांकन किया गया।
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उद्देश्य: छात्रों में अनुसंधान प्रवृत्ति, नवाचार और जटिल समस्याओं के समाधान ढूंढने के कौशल का विकास करना।
अब 'इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल' में दिखेगा दम
इस प्रदर्शनी में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले चयनित प्रतिभागियों को राष्ट्रीय स्तर के मंचों पर अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा, जिनमें शामिल हैं:
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इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल (IISF)
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उत्तर भारत विज्ञान मेला
इसके साथ ही, चयनित मेधावियों को उत्तर प्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा 'बाल वैज्ञानिक सम्मान' के लिए भी नामित किया जाएगा।
वैज्ञानिक चेतना का नया संचार
समापन अवसर पर आयोजकों ने प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि ऐसी प्रदर्शनियां बच्चों में वैज्ञानिक चेतना को सुदृढ़ करने और भारत के उज्ज्वल भविष्य के वैज्ञानिक तैयार करने में मील का पत्थर साबित होती हैं। काशी की धरती पर इस आयोजन ने प्रदेश के कोने-कोने से आए बच्चों को एक नई दृष्टि और प्रेरणा प्रदान की।