हिंदू एक है, राजनीतिक दलों के कारण दिखता है बिखराव –
वाराणसी के रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में आयोजित सनातन सम्मेलन में राजर्षि डॉ. बी. के. मोदी ने हिंदू एकता, धर्म, कर्म और भारत को विश्वगुरु बनाने की दिशा पर प्रेरणादायक विचार रखे।
वाराणसी से अश्वनी सेठ की रिपोर्ट
वाराणसी। विश्वविख्यात धार्मिक नगरी काशी में सनातन चेतना और राष्ट्रीय दृष्टिकोण को समर्पित एक भव्य सम्मेलन का आयोजन रविवार को सिगरा स्थित रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में किया गया। “हिंदू राष्ट्र बनाने में हम सब का योगदान और भावी भूमिका” विषय पर आयोजित इस सम्मेलन में देश-विदेश से आए संतों, विद्वानों, शोधकर्ताओं और श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि, विश्वप्रसिद्ध आध्यात्मिक चिंतक एवं वैश्विक दृष्टा राजर्षि डॉ. भूपेंद्र कुमार मोदी के कर-कमलों द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। अपने उद्बोधन में उन्होंने कहा कि “हिंदू समाज मूलतः एक है, लेकिन राजनीतिक दलों के कारण उसमें बिखराव दिखाई देता है।” उन्होंने समाज को एकजुट होकर सनातन मूल्यों के संरक्षण और प्रसार के लिए कार्य करने का आह्वान किया।
राजर्षि मोदी ने अपने संबोधन में जीवन के गूढ़ आध्यात्मिक सिद्धांतों को सरल भाषा में प्रस्तुत करते हुए सूर्य को ईश्वर का प्रत्यक्ष स्वरूप मानने, पुनर्जन्म की अवधारणा, कर्म की महत्ता, धर्म की प्रासंगिकता और मोक्ष प्राप्ति के मार्ग पर विस्तार से प्रकाश डाला। उनके विचारों ने उपस्थित जनसमूह को गहराई से प्रभावित किया।
कार्यक्रम संयोजक पंडित प्रकाश मिश्र ने बताया कि सम्मेलन के दौरान सनातन धर्म से जुड़े विभिन्न प्रश्नों का समाधान मुख्य अतिथि द्वारा किया गया, जिससे श्रोताओं को गहन आध्यात्मिक मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। कार्यक्रम का संचालन चक्रवर्ती विजय नावड एवं मोहिका सिंह ने किया।
इस अवसर पर काशी के प्रख्यात चित्रकार स्वर्गीय बैजनाथ वर्मा के सुपुत्र सिंधु वर्मा ने भगवान शिव का चित्र भेंट कर राजर्षि जी का सम्मान किया।
अंजू सिंह मिसेज काशी , दीक्षा श्रीवास्तव कोहिनूर मिसेज इंडिया इंटरनेशनल, नीलम चतुर्वेदी , सृष्टि भंडारी!
सम्मेलन में रीवा के महाराज पुष्पराज सिंह जूदेव, जगद्गुरु बालक देवाचार्य जी महाराज, वी. एस. सुब्रमण्यम मणि, स्वामी मुक्तानंद पुरी जी महाराज, प्रोफेसर पतंजलि मिश्र, विश्व हिंदू फेडरेशन के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अजय सिंह, भाजपा एमएलसी हंसराज विश्वकर्मा, महानगर अध्यक्ष प्रदीप अग्रहरि सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।
यह सम्मेलन आध्यात्मिक ज्ञान, सांस्कृतिक गौरव और राष्ट्रीय चेतना का एक प्रभावशाली संगम साबित हुआ। कार्यक्रम ने भारत को पुनः विश्वगुरु के रूप में स्थापित करने की दिशा में सामूहिक संकल्प को और अधिक सुदृढ़ किया।