Jainendra Kumar Nigam Success Story: जिसे पुलिस ने पहनाई थी हथकड़ी, वो बन गया DSP! 2 बार झूठे केस में जेल जाने के बावजूद पूरा किया पिता का सपना
Jainendra Kumar Nigam Success Story: भिंड के जैनेंद्र कुमार निगम दो बार फर्जी केस में जेल जाने के बाद DSP बने। उन्होंने DSP बनने के लिए तीन सरकारी नौकरियों को भी छोड़ा, पूरा किया पिता का सपना।
भिंड, मध्य प्रदेश: भिंड जिले के डोगरपुरा गांव निवासी जैनेंद्र कुमार निगम की सफलता की कहानी किसी फिल्म की पटकथा से कम नहीं है। कुछ साल पहले उनके हाथों में हथकड़ियां थीं और उन्हें दो बार फर्जी मुकदमों में जेल जाना पड़ा था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। अपनी मेहनत और अटूट लगन के दम पर, जैनेंद्र ने आज वो मुकाम हासिल कर लिया, जिसके लिए उनके पिता 25 साल से सपना देख रहे थे— वह अब DSP (डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस) बन गए हैं।
जैनेंद्र की यह प्रेरणादायक कहानी उन सभी अभ्यर्थियों के लिए एक मिसाल है, जिनका जीवन कठिनाइयों और संघर्षों से भरा है।
पिता का अधूरा सपना और जेल की सलाखें
जैनेंद्र के पिता केशव जाटव खुद MPPSC की तैयारी करते थे और 1996 से 2000 तक लगातार पांच बार मेंस का पेपर दिया था, लेकिन गांव के दबंगों द्वारा दर्ज मुकदमों में उलझकर उनका DSP बनने का सपना अधूरा रह गया।
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बेटा बना प्रेरणा: पिता के मन में दबी इस टीस को पूरा करने का संकल्प जैनेंद्र ने बचपन से ही ले लिया था।
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झूठे मुकदमों में जेल: 2019 और 2020 में, रंजिश के चलते दबंगों ने जैनेंद्र, उनके भाई और पिता पर फर्जी FIR दर्ज करा दी और उन्हें दो बार जेल भेज दिया गया। उनकी एक फोटो भी वायरल हुई थी, जिसमें थाने में उनके हाथों में हथकड़ी लगी थी।
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घर पर हमला: अप्रैल 2020 में, दबंगों ने उनके घर को भी जला दिया था।
डीएसपी बनने की जिद, तीन सरकारी नौकरी छोड़ी
जैनेंद्र की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि उन्होंने DSP के अलावा किसी भी पद को जॉइन करने से मना कर दिया।
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पिता का निर्देश: 2015 में पुलिस आरक्षक का पेपर पास करने पर पिता ने कहा, "बनना है तो DSP बनो।"
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मौके छूटे: 2017 में सब इंस्पेक्टर का पेपर निकाला, लेकिन फिजिकल से ठीक पहले लड़ाई होने के कारण परीक्षा नहीं दे पाए। 2019 में इतिहास विषय से शिक्षक वर्ग-1 का पेपर पास किया, पर जॉइन नहीं किया।
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अन्य पद: DSP बनने से पहले, वह राज्य सेवा परीक्षा-2020 में नायब तहसीलदार (मंदसौर जिले की गरोठ तहसील में कार्यरत), वन सेवा परीक्षा-2020 में रेंजर, और राज्य प्रशासनिक सेवा परीक्षा 2022 में सहायक संचालक स्कूल शिक्षा विभाग के पद पर चयनित हो चुके थे, लेकिन DSP बनने की जिद में उन्होंने इन नौकरियों को जॉइन नहीं किया।
"पापा आपका बेटा DSP बन गया"
कुछ महीनों बाद जैनेंद्र जेल से जमानत पर बाहर आए, मुकदमों से अपना नाम हटवाया और पूरी लगन से पढ़ाई शुरू कर दी। उन्होंने अपने कमरे में दिन में 7 से 8 घंटे पढ़ाई की और ऑनलाइन मॉक टेस्ट से तैयारी की।
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सफलता: हाल ही में MPPSC का परिणाम घोषित होने पर जैनेंद्र का नाम DSP के रूप में सामने आया।
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खुशी के आंसू: उन्होंने फोन पर पिता केशव जाटव को बताया, "पापा आपका बेटा DSP बन गया है"। यह सुनकर पिता का गला रुंध गया और उनकी आंखों में खुशी के आंसू आ गए।
जैनेंद्र कुमार निगम सक्सेस स्टोरी उन सभी को हिम्मत देती है जो मुश्किलों में हार मान लेते हैं।