जयपुर टोल प्लाजा फास्टैग फ्रॉड: कार घर में खड़ी थी, फिर भी कट गया ₹55 का टोल; आयोग ने प्लाजा प्रबंधक पर 800 गुना, ₹45,000 का लगाया जुर्माना
Jaipur Toll Plaza Fastag Fraud: घर में खड़ी कार का फास्टैग से ₹55 टोल कटने पर जिला उपभोक्ता आयोग ने टोल प्लाजा प्रबंधक पर ₹45,000 का हर्जाना लगाया। आयोग ने लापरवाही को सेवा में कमी माना।
जयपुर, राजस्थान: राजस्थान के जयपुर में दौलतपुरा टोल प्लाजा पर फास्टैग से गलत तरीके से टोल काटने के एक चौंकाने वाले मामले में जिला उपभोक्ता आयोग ने बड़ा फैसला सुनाया है। उपभोक्ता आयोग ने इसे गंभीर लापरवाही और सेवा में कमी मानते हुए टोल प्लाजा प्रबंधक पर ₹45,000 रुपये का हर्जाना लगाया है।
पीड़ित अशोक सैनी की ओर से दाखिल परिवाद पर फैसला सुनाते हुए आयोग ने टोल प्लाजा प्रबंधक को काटे गए ₹55 रुपये की राशि 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित लौटाने का भी निर्देश दिया है।
घर में खड़ी कार का कटा टोल
पीड़ित अशोक सैनी ने अपनी कार पर लगा फास्टैग पेटीएम बैंक के माध्यम से जारी करवाया था।
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घटनाक्रम: 20 अगस्त 2022 की सुबह अशोक सैनी को मोबाइल पर एक मैसेज प्राप्त हुआ कि उनकी कार ने सुबह 9:42 बजे दौलतपुरा टोल प्लाजा को पार किया है और इसके बदले ₹55 रुपये की टोल राशि काट ली गई है।
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सच्चाई: परिवादी के अनुसार, घटना के समय उनकी कार घर पर खड़ी हुई थी और उसने किसी टोल प्लाजा को क्रॉस नहीं किया था। यह स्पष्ट था कि टोल प्लाजा प्रबंधन ने बिना वास्तविक एंट्री के गलत तरीके से टोल राशि ले ली।
उपभोक्ता आयोग का कड़ा रुख
अशोक सैनी ने इस घटना से परेशान होकर टोल प्लाजा प्रबंधक के खिलाफ उपभोक्ता आयोग में परिवाद दायर किया। आयोग ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पाया कि टोल काटना पूर्णतः गलत था और यह उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन था।
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निर्णय: आयोग ने कहा कि फास्टैग प्रणाली का उद्देश्य पारदर्शिता और सुविधा प्रदान करना है, लेकिन इस तरह की लापरवाही सिस्टम की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा करती है।
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जुर्माना: आयोग ने टोल प्लाजा प्रबंधक को उपभोक्ता को मानसिक पीड़ा, समय की बर्बादी और उत्पीड़न के लिए ₹45,000 रुपये का हर्जाना देने का आदेश दिया।
जयपुर टोल प्लाजा फास्टैग फ्रॉड मामले में दिया गया यह फैसला उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण उदाहरण है।