राजस्थान हाईवे किनारे शराब ठेके हटेंगे: HC ने सरकार को लगाई फटकार, 'बना डाला शराब फ्रेंडली कॉरिडोर'; 1102 ठेकों को 2 महीने में हटाने का आदेश

Rajasthan Highway Kinare Sharab Theke Hatenge: राजस्थान हाई कोर्ट ने हाईवे किनारे चल रहे 1102 शराब ठेकों को 2 महीने में हटाने का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा, सरकार ने हाईवे को 'लिकर-फ्रेंडली कॉरिडोर' बना दिया है।

Nov 27, 2025 - 13:11
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राजस्थान हाईवे किनारे शराब ठेके हटेंगे: HC ने सरकार को लगाई फटकार, 'बना डाला शराब फ्रेंडली कॉरिडोर'; 1102 ठेकों को 2 महीने में हटाने का आदेश

जयपुर, राजस्थान: राजस्थान हाई कोर्ट ने नेशनल और स्टेट हाईवे के किनारे चल रही शराब की दुकानों पर सख्त रुख अपनाते हुए एक बड़ा और कड़ा आदेश जारी किया है। कोर्ट ने टिप्पणी की कि "राजस्थान सरकार ने नेशनल और स्टेट हाईवे को 'लिकर-फ्रेंडली कॉरिडोर' बना दिया है।"

जस्टिस डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी और न्यायमूर्ति संजीत पुरोहित की दो सदस्यीय खंडपीठ ने निर्देश दिया है कि हाईवे से 500 मीटर की दूरी के भीतर स्थित सभी 1102 शराब ठेकों को दो महीनों के भीतर अनिवार्य रूप से हटाया जाए।


राजस्व से ज्यादा महत्वपूर्ण है लोगों की सुरक्षा

यह आदेश चूरू के रहने वाले कन्हैयालाल सोनी की जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया। अदालत ने राज्य सरकार के राजस्व से जुड़े तर्क को सीधे तौर पर नकार दिया।

  • सरकार का तर्क: सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने स्वीकार किया कि प्रदेश में मौजूद 7665 शराब दुकानों में से 1102 दुकानें हाईवे के किनारे स्थित हैं। सरकार ने सफाई दी कि ये दुकानें नगर सीमा के भीतर आती हैं, इसलिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा दी गई छूट में शामिल हैं। साथ ही, इन दुकानों से ₹2221 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व प्राप्त होता है।

  • कोर्ट का रुख: हाई कोर्ट ने इस तर्क को नकारते हुए कहा कि राजस्व से ज्यादा महत्वपूर्ण आम लोगों की सुरक्षा है। कोर्ट ने साफ कहा कि सरकार ने अनुच्छेद 21 में प्रदत्त जीवन और सुरक्षा के अधिकार की अनदेखी करते हुए अपने अधिकारों का गलत इस्तेमाल किया है।


शहरी सीमा का बहाना नहीं चलेगा

अदालत ने सख्त नाराजगी जताते हुए कहा कि नगरपालिका सीमा (म्युनिसिपल एरिया) का बहाना बनाकर सरकार ने हाईवे को 'लिकर-फ्रेंडली कॉरिडोर' में बदल दिया है, जो स्वीकार्य नहीं है।

कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि अगर ये दुकानें शहरी सीमा में भी आती हों और हाईवे के किनारे चल रही हैं, तो उन्हें अनिवार्य रूप से हटाना होगा। इस कड़े फैसले की मुख्य वजह बढ़ती सड़क दुर्घटनाएं और नशे में वाहन चलाने के मामले हैं।